झारखण्ड के कई जिलों में है सूखे के हालात, धान की खेती पर पड़ा असर

झारखंड में इस साल कम बारिश की वजह से सुखाड़ की संभावना बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 24 जिलों के 180 प्रखंडों में सुखाड़ तय है। झारखंड मंत्रालय में राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह के द्वारा आहूत समीक्षा बैठक के बाद की ये जमीनी हकीकत है. राज्य के 18 लाख हेक्टेयर में धान की फसल की तुलना में इस बार अब तक मात्र 30 प्रतिशत ही रोपनी हो सकी है। इस साल के हालत को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक खेती पर काम करना शुरू कर दिया है। सरकार किसनो को कम पानी में तैयार होने वाली फसल को उगने का आग्रह कर रही है। सरकार का कहना है की बहुत जल्द ही किसानो को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का बीज मुहैया करा देगी।

मानसून की बेरुखी के बाद अब झारखंड में सुखाड़ के हालात नजर आने लगे हैं. पहले औसत से कम बारिश और उसके बाद मात्र 30 प्रतिशत तक धान की रोपनी ने भविष्य की स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। जामताड़ा, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ में हालत ज्यादा खराब है। इन जिलों में 60 से 90 फीसदी तक कम बारिश हुई।

सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार दो तरह से आगे बढ़ रही है। पहला यह कि 22 अगस्त को होने जा रही कैबिनेट की बैठक में सुखाड़ के प्रस्ताव को मुहर लगा कर इसे केंद्र से राहत पैकेज के लिये भेजा जाए। दूसरी ओर आपदा प्रबंधन प्राधिकार की जल्द बैठक के लिये भी प्रस्ताव सीएमओ भेज दिया गया है। इस बैठक में केंद्र के तय मानकों के आधार पर प्रभावित प्रखंडों को सुखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है।

कृषि विभाग से जारी आदेश के अनुसार एक जून से 3 अगस्त तक सामान्य वर्षापात (538.7 एमएम) की जगह पर 282 एमएम बारिश हुई है जो सामान्य से 48 प्रतिशत कम है। यह भी बताया गया है कि पूर्वी सिंहभूम जिले में सामान्य वर्षापात हुई है। अब जबकि ये तय माना जा रहा है कि इस बार 60 प्रतिशत कम अनाज का उत्पाद होगा, तब वैकल्पिक खेती को लेकर भी तैयारी शुरू कर दी गई है. विभाग ने कम पानी मे तैयार होने वाली फसल पर फोकस किया है. कृषि विभाग ने इसको लेकर अधिकारियों को विशेष तौर पर दिशा निर्देश भी जारी कर दिया है.

राज्य के जिलों को सूखा क्षेत्र घोषित होने को लेकर अभी कई प्रक्रिया बाकी है. केंद्र सरकार के मापदंड को पूरा करने के बाद प्रभावित प्रखंडों की सूची आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जाएगी. सुखाड़ के लिये चिन्हित प्रखंड और जिला का स्पोर्ट सर्वे के लिये केंद्रीय टीम का दौरा भी अभी बाकी है. मतलब साफ है कि झारखंड सुखाड़ के रास्ते पर जरूर आगे बढ़ रहा है, पर आधिकारिक घोषणा में अभी वक्त लगेगा.