झारखंड के डुमरहता में 30 एकड़ में ‘पिपरमेंट की खेती’, किसानों को हो रहा अच्छा मुनाफा

झारखण्ड के पलामू जिले के किसान कभी कड़ी मेहनत करने के बाद भी औसतन आमदनी ही कर पाते थे लेकिन आज मेहनत के बल पर हाथों की लकीर को बदलने की कला अब झारखंड के पलामू जिले के किसान बखूबी सीख गये हैं। पलामू जिले के किसान अब अपनी परंपरागत खेती को छोड़कर अब व्यावसायिक खेती को अपनाकर अपने खेतों से सोना निकाल रहे हैं। जिन खेतो में कभी  रबी और खरीफ फसलों की पैदावार के बाद परती रहती थी. अब उस परती खेत में इस भीषण गर्मी में फसलें लहलहा रही हैं। आज पालमु जिले के किसान पिपरमेंट मेंथा  की खेती कर के अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे है। दंगवार पंचायत के डुमरहाता के किसान पिपरमेंट मेंथा  के अलावा शुगर फ्री आलू, काला धान (ब्लैक राइस) की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इन सब में अच्छा मुनाफा देखकर अब अन्य किसान भी इस खेती को करने का मन बना रहे हैं।

मेंथा की खेती से बदल सकती है किस्मत

किसानों के हालात को मेंथा यानी पिपरमेंट की खेती बदल सकती है. किसान एक एकड़ में फसल उपजाकर लगभग एक लाख रुपये तक मुनाफा कमा सकते है।  यह उनकी आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है। 90 दिनों में तैयार होने वाली इस फसल में किसान कुछ ही समय में मुनाफा कमा सकते हैं. वैसे मेंथा में फसल के दौरान खेतो में हल्की नमी जरूरी रहती है. फसल के दौरान इसमें कई बार पानी लगाया जाता है. वहीं कटाई के समय मौसम के साफ रहने का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

कैंसे करें रोपाई

खेतों की चार-पांच बार जुताई करा लें। उसमें गोबर की खाद डालना जरूरी है। पिपरमिंट के एक दिन पहले पानी में भिगोकर रखें। खेत तैयार होने पर उसमें पानी लगाकर 10 से 15 जनवरी के बीच बीज छिड़क कर डालें। 20-25 दिन में तैयार नर्सरी को खेत में पानी लगाकर उसमें डीएपी की छिड़काव करें और रोपाई कर दें। पौधे की दूरी आठ इंच की होनी चाहिए। दो माह बाद यानि कि मार्च के अंतिम सप्ताह में फसल तैयार होगी। इसकी सिंचाई के लिए खेतों में पानी न लगे लेकिन नमी हमेशा बनी रहे। बीच में दो गुड़ाई भी जरूरी है।

बाजार में क्या है इसका दाम

पिपरमिंट का तेल तैयार होने के तुरंत बाद बेचने से 16 सौ से 18 सौ रुपये प्रति किलो तेल बिकता है। यदि एक साल तेल को रोक दिया जाए तो यही तेल तीन हजार रुपये किलो तक बिकता है। यह क्षेत्रीय बाजारों का हाल है। किसान सीधे कंपनी को अपना उत्पाद दे तो कम से कम चार हजार रुपये प्रति किलो उसे इसका लाभ मिल सकता है।

खेती है थोड़ी महंगी, लेकिन मुनाफा अधिक

यह खेती थोड़ी महंगी जरूर है, लेकिन उसके मुकाबले फायदा भी अधिक होता है. एक एकड़ में पिपरमेंट की खेती करने में करीब 15 से 20 हजार का खर्च आता है. चार से पांच बार सिंचाई करनी पड़ती है. करीब 100 से 120 दिन में फसल तैयार हो जाती है. गेहूं की फसल कटाई के बाद इसकी खेती शुरू होती है और धान के बिचड़े डालने से पहले इसकी फसल तैयार होकर कट जाती है।

विविध उपयोग

टेस्टी टाफी, पान, साबुन, ठंडा तेल, टूथ पेस्ट आदि से लेकर विभिन्न औषधीय निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है।