झारखंड में पिछले 10 साल में सबसे कम बारिश,किसान परेशान , 5.8 फीसदी ही हुई है धान की रोपनी

झारखंड में मानसून आने के बाद भी लोगों को अच्छी बारिश का इंतजार है।  राज्य में इस बार 48 प्रतिशत कम बारिश हुई है।  झारखंड में कम बारिश से किसानों की मुश्किलें अब बढ़ने लगी हैं।  कम बारिश से खेतों में नमी गायब हो गयी है, जिससे सूखे के आसार दिखने शुरू हो गये हैं।  पिछले 10 साल में अब तक सबसे कम बारिश हुई है। पूरे राज्य में औसत से 48 प्रतिशत कम बारिश (Rain) हुई है और धान की बुआई का प्रतिशत अब तक महज 5.81 है. दलहन, तिलहन, मोटा अनाज और अन्य फसलों की खेती भी कमजोर पड़ गई है. हाल ये है कि राज्य के 24 में से 16 जिलों में धान की खेती की अभी कायदे से शुरुआत भी नहीं हुई है. जहां किसानों ने खेतों में बीज डाल दिए हैं, वहां भी बिचड़े सूख रहे हैं.. कई जिलों तो अब तक रोपा शुरू भी नहीं हो सका है। इस कारण  से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें झलकने लगी है। 

नहीं हुई धान की रोपनी 

पिछले साल करीब 17.64 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। इस साल 18 लाख हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य है। लेकिन मानसून में कम बारिश होने के कारण सभी जिलों में धान की रोपनी शुरू नहीं हुई है। सामान्य की तुलना में राज्य 4 जुलाई तक महज भर 15.73 प्रतिशत बारिश हुई है। इसका असर धार की रोपनी पर दिख रहा है। कम बारिश से उपजे संकट को लेकर कृषि विभाग में उच्च स्तर पर बैठकें शुरू हो गई हैं. विभाग रणनीति बनाने में जुटा है कि बारिश की कम मात्रा को देखते हुए किस तरह के वैकल्पिक फसलों की तैयारी के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए.

कम हुई बारिश 

सबसे खराब हालत साहिबगंज, पाकुड़, चतरा, पलामू, गढ़वा, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, धनबाद, बोकारो, देवघर, जामताड़ा और गोड्डा जिले की है और आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं. साहिबगंज में औसत से 80 फीसदी कम बारिश हुई है. चतरा में औसत से 73 फीसदी, पाकुड़ में 72, गढ़वा में 69, गोड्डा में 66, पलामू में 62, रामगढ़ में 58 और हजारीबाग में 56 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.

पलामू में वैकल्पिक फसलों की तैयारी का निर्देश :

पलामू आयुक्त जटाशंकर चौधरी ने मौसम की वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रमंडल में पड़नेवाले पलामू, गढ़वा और लातेहार के उपायुक्तों को पत्र लिखकर वैकल्पिक फसलों की तैयारी करने का निर्देश दिया है. कहा है कि हर मंगलवार को जिलास्तरीय टॉस्क फोर्स की बैठक करें. इसमें कृषि के साथ-साथ सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी बुलायें. तत्काल वैकल्पिक खेती की तैयारी शुरू करें.

हालात की समीक्षा की गई

कृषि निदेशक निशा उरांव ने कहा कि सरकार की ओर से बुलाई गई बैठक में हालात की समीक्षा की गई है. हम किसानों तक संदेश पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं कि छोटी अवधि में फसल देने वाले बीज लगाएं. कम बारिश को देखते हुए अंजलि, ललाट, वंदना, बिरसा सुगंधा आदि किस्म के धान बीज लगाना उचित होगा.

17 जिलों में 50% से भी कम बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के 17 जिलों में सामान्य से 50% से भी कम बारिश हुई है. पूर्वी सिंहभूम और खूंटी को छोड़कर सभी जिलों में ही सामान्य के करीब बारिश हुई है. पूरे राज्य में भी सामान्य से करीब 51 % कम बारिश हुई है. राज्य में अब तक 391 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. इसकी तुलना में मात्र 192.9 मिमी ही बारिश हुई है. एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां सामान्य से अधिक बारिश हुई है. 

16 जिलों की स्थिति चिंताजनक

कृषि निदेशक निशा उरांव ने एक दिन पूर्व राज्य के जिला कृषि पदाधिकारी, केवीके और संयुक्त कृषि निदेशक के साथ बैठक की थी. इसमें 16 जिलों की स्थिति चिंताजनक बतायी गयी थी. इसमें कहा गया है कि अब बारिश भी होगी, तो उत्पादकता और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. ऐसे में कुछ ठोस पहल करने की जरूरत है. सबसे खराब स्थिति चतरा, देवघर, गढ़वा, गुमला, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़, पलामू, रामगढ़, साहिबगंज, खूंटी व सिमडेगा जिले की है.