जॉर्डन के पोर्ट पर जहरीली गैस लीक से 12 की मौत, लोगों से घरों में रहने की अपील

जोर्डन के अकाबा बंदरगाह पर एक बड़ा हादसा हुआ है | जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह में एक जहाज पर क्लोरीन टैंक लोड करने वाली एक क्रेन ने सोमवार को उनमें से एक को गिरा दिया, जिससे जहरीले पीले धुएं का एक बड़ा विस्फोट हुआ और 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हो गए। लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है |

सरकार की अपील- घरों में ही रहें

सरकार ने लोगो से अपील की है की वे लोग घर में ही रहे | अकाबा हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से जारी एक स्टेटमेंट में कहा है -“हम शहर के लोगों से अपील करते हैं कि वो अगले आदेश तक अपने घरों में ही रहें। अगर दिक्कत ज्यादा है तो घरों के दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह बंद रखें। हमें लगता है कि मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है, क्योंकि कई घायलों की हालत बेहद गंभीर है।” एहतियात के तौर पर अकाबा के दक्षिणी समुद्र तट को भी खाली करा लिया गया है। इसके अलावा, नागरिक सुरक्षा विभाग ने रिसाव और सफाई अभियान से निपटने के लिए विशेषज्ञ टीमों को बंदरगाह पर भेजा।

कर्मचारियों की गलती से हादसा

हादसा कर्मचारियों की गलती की वजह से हुआ. जब सिलेंडर शिप पर लोड किया जा रहा था, तभी बेहद तेज धमाका हुआ. इसके बाद सिलेंडर जमीन पर आ गिरा. इस पोर्ट पर घटना के वक्त करीब 25 टन क्लोरीन गैस स्टोर थी | बंदरगाह के एक आधिकारिक बयान के मुताबिक कंटेनर को ले जा रही एक “लोहे की रस्सी” उस समय “टूट गई” जब इसे एक जहाज पर लादा जा रहा था। उन्होंने बताया कि कंटेनर 25 से 30 टन क्लोरीन से भरा हुआ था और जिबूती को निर्यात किया जा रहा था।

फील्ड अस्पताल बनाया

सरकार ने फौरन फील्ड अस्पताल बनाने के आदेश दिए हैं. अकाबा की जनसंख्या करीब एक लाख 88 हजार है. यहां से कुछ दूरी पर इजराइली शहर ईलत है. इसकी आबादी 50 हजार है. दोनों शहर सड़क से भी जुड़े हुए हैं. हमने हालात को काबू कर लिया है, लेकिन ये सही है कि कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर है|

क्लोरीन का इस्तेमाल

क्लोरीन एक रसायन है, जिसका उपयोग उद्योग और घरेलू सफाई उत्पादों में किया जाता है। यह सामान्य तापमान और दबाव पर पीली-हरी गैस है। जब क्लोरीन को निगला जाता है या त्वचा के संपर्क में आता है, तो यह पानी के साथ प्रतिक्रिया करके शरीर में कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले एसिड का उत्पादन करता है। गैस के उच्च स्तर को अंदर लेने से फेफड़ों में द्रव का निर्माण होता है, एक जानलेवा स्थिति जिसे फुफ्फुसीय एडिमा के रूप में जाना जाता है।