दक्षिणी राज्यों में मानसून का कहर, कर्नाटक और केरल में बाढ़

देश के कई हिस्सों में मानसून का कहर अभी भी जारी है। दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। केरल और कर्नाटक में तो यह स्थित है कि लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है।  इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने अन्य  दक्षिणी राज्यों के लिए भी चेतावनी जारी कर दी है। यहां आने वाले दो से तीन दिनों में मानसूनी बारिश कहर बरपाएगी।

इन राज्यों के लिए जारी हुई चेतावनी 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 8 और 9 सितंबर को कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में भारी वर्षा, गरज और बिजली गिरने का अनुमान लगाया है. इस बीच, केरल, लक्षद्वीप, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में 6, 7 और 9 सितंबर को ‘बहुत भारी वर्षा’ होगी। 

कर्नाटक के 16 जिलों में बाढ़ का असर

इतना ही नहीं बेंगलुरु के अलावा कर्नाटक के अन्य कई जिलों में भी बाढ़ की तबाही है। सोमावर देर रात राज्य के सीएम बसवराज बोम्मई ने बेंगलुरू नगर सहित बारिश से प्रभावित 16 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ आपात बैठक की और इस बैठक में राजधानी बेंगलुरू में हालात सामान्य करने के लिए फौरी तौर पर तीन सौ करोड़ रुपए आवंटित करने का फैसला लिया गया।

केरल के इन जिलों में रेड अलर्ट 

इस बीच भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने कल के लिए तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पठानमथिट्टा और इडुक्की जिलों के लिए रेड अलर्ट और अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वही एर्नाकुलम, इडुक्की, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझीकोड, वायनाड और कन्नूर के लिए भी ऑरेन्ज अलर्ट जारी किया है। केरल में बाढ़ से मरने वालो की संख्या २६ हो गयी है। 

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश

इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने अन्य दक्षिणी राज्यों के लिए भी चेतावनी जारी कर दी है। यहां आने वाले दो से तीन दिनों में मानसूनी बारिश कहर बरपाएगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में आठ व नौ सितंबर को भारी बारिश, तूफान और बिजली गिरने की संभावना है। 

यूपी में लाखों लोग बाढ़ की चपेट में

उत्तर प्रदेश का भी बड़ा हिस्सा इस समय बाढ़ की त्रासदी झेल रहा है। यहां 22 जिलों में 2.4 लाख लोग बाढ़ से  प्रभावित हैं। अधिकारियों के मुताबिक 1079 गांव बाढ़ झेल रहे हैं और इनमें से 153 ऐसे हैं जिनसे संपर्क कट चुका है। गंगा और वरुणा नदी के बढ़ते जल स्तर की वजह से वाराणसी में बाढ़ आ गई है। हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पर लाए जाने वाले शव अब छतों और पास की गलियों में जलाने पड़ रहे हैं।