Khejadi Bachao Andolan क्या है, बड़े जन आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान में पेड़ों की कटाई के खिलाफ एक आंदोलन (#खेज़डी_बचाओ) शुरू हो गया है। राजस्थान के फलौदी भाप में सोलर प्लाट के बहाने बड़ी संख्या में काटी जा रही खेजड़ी और अन्य पेड़ों के विरोध में 50 लोगों ने उपवास रखकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ीसिड्ड में दिनभर धरना प्रदर्शन चलता रहा, वहीं फलोदी में एडीएम कार्यालय के आगे दोपहर बाद धरना शुरू किया, जो देर शाम तक जारी रहा। पेड़ो को कटाने का मामला अब गर्माता जा रहा है। पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील माना जाने वाला बिश्वोई समाज (Bishnoi Community) जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक इसके खिलाफ मुहिम चला रहा है।  बिश्रोई समाज ने प्रशासन, स्थानीय पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन के बाद अब इस आंदोलन  को सोशल मीडिया पर भी तेज कर दिया है। हैशटैग #बाप_प्रकरण  को ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा है ताकि सरकार और लोगो का धयान इस  तरफ जाये और सैकड़ों पेड़ काटने के मामले में कार्रवाई की जाए।

राजस्थान के लिए बेहद अहम है खेजड़ी

खेजड़ी, राजस्थान का राज्य वृक्ष है। पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व होने की वजह से राजस्थान के लोगों, खासकर बिश्नोई समाज के लिए खेजड़ी का पेड़ काफी अहम है। राजस्थान में खेजड़ी को तुलसी के पौधों की तरह ही पूजा जाता है। खेजड़ी के पेड़ को लोग देश में अलग अलग नाम से भी जानते है जैसे की शमी, खिजरो, झंड, जाट, खार, कांडा और जम्मी।  बिशनोई समाज पर्यावरण के प्रति काफी संवेदनशील है और सदियों से बिश्नोई समाज ने प्रकृति को संरक्षित रखने और उसकी रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया है। कहा जाता है की साल 1730 को जोधपुर के पास एक छोटे से गांव में बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने एक बहादुर महिला के नेतृत्व में खेजड़ी के पेड़ों को काटने का विरोध किया था जिसके चलते उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी.।

क्या है विवाद

जोधपुर जिले के बाप में सोलर प्लांट के लिए हजारों पेड़ों को काटने का मामला सामने आया है। बिशनोई समाज का कहना है की सोलर प्लांट के लिए ली गई जमीनों पर मौजूद खेजड़ी के हजारों पेड़ों को काट दिया गया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसमें हजारों पेड़ खेजड़ी के भी थे. आरोप है कि प्रशासन के लोग इसमें मिले हुए हैं और उनकी मिलीभगत से ही ये पेड़ काटे जा रहे हैं। खेजड़ी के लगभग 8,000 पेड़ों को काटकर जमीन में दफना दिया गया था. बिश्नोई समाज ने इन पेड़ों को खोज निकाला और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। बिश्नोई समाज का कहना है की इस इलाके में हिरण भी रहते थे लेकिन अब वे नहीं दिख रहे. स्थानीय लोग आशंका जता रहे हैं कि हिरणों को भी मारकर दफना दिया गया है. यही वजह है कि इलाके में जगह-जगह खुदाई कराने के लिए जोधपुर प्रशासन से अनुमति मांगी जा रही है.

जिम्मेदारों को निलम्बित की मांग

विश्नोई महासभा ने ज्ञापन में दोषी उपखण्ड अधिकारी, थानाधिकारी, राजस्व विभाग के भू-प्रबंध निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी को निलंबित करने की मांग की। इसी तरह पेड़ काटने वालों, सोलर कम्पनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने, सोलर कम्पनियों को किराये व लीज पर दी गई जमीन पर लगे पेड़ों को मार्क करने, सोलर से आय का तीस फीसदी हिस्सा ग्रीन बेल्ट विकसित करने में खर्च करने, खेजड़ी व वन्यजीवों को क्षति नहीं पहुंचाने सहित नौ सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा।

बड़ा जन आंदोलन का एलान

पेड़ हमें प्राण वायु देते हैं. अगर विकास के नाम पर इस तरह पेड़ काटेंगे तो मानव समाज और प्राणी जगत के लिए नुकसान है. इस पर सरकार को पुनः विचार करना चाहिए. यदि खेजड़ी और अन्य मरुस्थलिय पेड़ों को काटना नहीं रोका गया तो लोग स्थानीय लोग बड़ा जान आंदोलन करेंगे। स्थानीय लोगो ने कहा है की खेजड़ी को काटने नहीं देंगे। पेड़ों को लगाने से ज्यादा उन्हें बचाना ज्यादा जरूरी है।

खुदाई करके दिखाया सच, जमीन से निकले कटे हुए पेड़

अपने आरोपों की सच्चाई साबित करने के लिए स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों, बिश्नोई समाज के लोगों और महंत भगवानदास की अगुवाई में जब जेसीबी से खुदाई करवाई गई तो खजेड़ी के पेड़ों के अवशेष जमीन में दबे मिले. इस तरह से सच उजागर होने के बाद अब प्रशासन के भी कान खड़े हो गए हैं. जमीन से पेड़ निकलने की घटना सामने आने के बाद इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।