जाने एक रहस्यमयी कंकाली झील के बारे में, कैसे बनी ये झील कंकाली

क्या आपने कभी एक ऐसी झील के बारें में सुना हैं जिसके अन्दर इंसानी कंकाल मिले हो अगर नही तो आज आप जन जाओगे उस झील के बारें में. चलिए जानते हैं विस्तार से .

 

ये बात हैं वर्ष 1942 की जब एच.के.माधवल वन के रक्षक हुआ करते थे. तभी उन्होंने रूपकुंड झील में इन कंकालों को देखा था और वर्ष 1960 के दशक में एक कंकाल से कार्बन डेटिंग ली गई. जिससे उन्हें पता चला कि वे कंकाल करीब 1200 साल पुराने हैं. इस पर विशेषज्ञों ने अनुमान जताया कि उन लोगों की मौत कारण कोई महामारी, भूस्खलन या बर्फानी तूफान हो सकता हैं. तो आएये आज हम आपको बतायेगें.. एक ऐसी झील के बारे में.. जहाँ पर सेकड़ो की संख्या में कंकाल मिले..

Roopkund Trek: Journey to the Lake of Skeletons - Memorable India BlogMemorable India Blog

वर्ष 2004 में भारतीय और यूरोपीय वैज्ञानिकों का एक दल उस स्थान का दौरा करने के लिए गया. उस दल ने कंकालों के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए कंकालों के गहने, खोपड़ी, हड्डी और शरीर के संरक्षित ऊतक हासिल करके रिसर्च करना शुरू किया.

इस झील में पानी नहीं नरकंकाल मिलते हैं... - roopkund lake and human skeletons - AajTak

 

जब उन्होंने लाशों का डीएनए परीक्षण किया तो पता चला कि झील में मिलने वाले लोग अलग-अलग समूहों के थे. इनमें एक समूह छोटे कद वाले लोगों का था. बताया जा रहा हैं कि वे लोग शायद स्थानीय निवासी थे और जो की वहां कुली के रूप में समूह के साथ गये थे. वैज्ञानिको को वहीं एक समूह लंबे लोगों के कंकालों का भी मिला. बताया जा रहा है कि ये लोग महाराष्ट्र में कोकणी ब्राह्मण थे.

रूपकुंड के सबसे बड़े रहस्य का खुलासा, उस वजह से यहां मिलते हैं कंकाल (The secret of roopkund)

रूपकुंड झील में इस तरह के लगभग 500 से भी ज्यादा कंकाल मिले हैं. हालांकि माना ये भी जाता है कि मरने वालों की संख्या 600 से ज्यादा रही होगी. ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इन लोगों की मौत की सही अवधि जानने के लिए उन कंकालो की रेडियोकार्बन डेटिंग की. जिससे पता चला कि वे कंकाल 850 ई. से 880 ई. के हैं. यानी की लगभग 1200 साल पुराने हैं.

नर कंकाल से भरी है उत्तराखंड की रूपकुंड झील जानिए क्या है रहस्य - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य

भारत और यूरोपीय वैज्ञानिकों का दल इन कंकालों पर लगातार हैदराबाद, पुणे और लंदन में रिसर्च करता रहा हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये था कि इतने बड़े समूह की अचानक मौत कैसे हो गई और उनके शव झील में कैसे पहुंच गए. जब इसकी जांच की तो पता चला कि लोगों का इतना बड़ा समूह किसी बीमारी की वजह से नहीं मरा बल्कि वो हिमालयी इलाको में आए बर्फीले तूफान से मरा थे.

DNA study deepens mystery of lake full of skeletons

वैज्ञानिकों ने बताया कि सभी कंकालों की खोपड़ी फ्रैक्चर थी. इसका साफ साफ मतलब था कि हिमालयी यात्रा के दौरान अचानक से तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई. माना जा रहा हैं की तभी आसमान से क्रिकेट की गेंद जितने भारी ओले गिरने शुरू हो गये और आसपास कहीं भी छिपने का कोई ठिकाना नहीं मिला. जिसके कारण धीरे-धीरे लोग घायल होकर गिरने लगे और उसके बाद ठंड के कारण उनकी मौत हो गई.

Cool and Unusual Things to Do in Chamoli - Atlas Obscura

वैज्ञानिकों ने ये भी अनुमान है कि उस क्षेत्र में भूस्खलन के कारण अधिकतर लाशें बहकर रूप कुंड झील में पहुंच गई. हालांकि कम घनत्व वाली हवा और बर्फीले वातावरण के कारण कई लाशें अभी भी इस इलाके में भली भांति अवस्था में दबी हुई हैं. वैज्ञानिक आज तक इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पाए हैं कि 9वीं सदी में लोगों का इतना बड़ा समूह आखिरकार कहां जा रहा था.

Roopkund Jheel | नर कंकालों से भरी रूपकुंड झील का रहस्य

आपको बता दे की इस रूट पर तिब्बत के लिए कोई व्यापार मार्ग भी नहीं है. कुछ लोग ये अनुमान लगते हैं कि इस इलाके में हर 12 साल बाद नंदा देवी राज जात उत्सव मनाया जाता है. जिसमें देश-दुनिया से लोग भाग लेने के लिए पहुंचते हैं. अनुमान के अनुसार इस यात्रा में जाते समय पूरे समूह की मौत हो गई होगी.

Roopkund Skeleton Lake Is A Burial Ground For European Regfugees - उत्तराखंड की रूपकुंड झील को क्यों कहा जाता है कंकाल झील, ये है वजह | Patrika News

ये रूपकुंड झील, हिमालय की दो चोटियों त्रिशूल और नंदघुंगटी के तल के पास स्थित है. यह झील वर्ष के ज्यादातर समय बर्फ से ढकी हुई रहती है. आम तौर पर ट्रैकर और रोमांच प्रेमी सड़क मार्ग से लोहाजंग या वाण से रूपकुंड की यात्रा करते हैं. हालांकि डर की वजह से कोई भी इस झील में स्नान या पानी को हाथ में लेने की हिम्मत नहीं कर पाता.

 

STORY BY – UPASANA SINGH