जानिए उन शहरों के बारे में, जो ग्लोबल वार्मिग से निपटने के लिए निकालें कई तरीके…

बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए ऐसा लगता है जैसे आने वाले समय में यह हमारे वातावरण के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है। ग्लोबल वार्मिंग से होने वाले पर्यावरण दुष्प्रभावों से हमारी आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। लेकिन विश्व में कुछ ऐसे देश भी हैं जो ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।तो इसी क्रम में जान लेते हैं की वो कौन से देश हैं और क्या हैं उनके तरीके…

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1-इसमें अमेरिकी देश कोलंबिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर मेडेलिन का नाम सबसे पहले आता है, 2016 से 30 ग्रीन कोरिडोर बनाने में जुटा है। इसके लिए पूरे शहर में नौ हजार पेड़ लगाए गए हैं जिन पर 1.6 करोड़ डॉलर खर्च किया गया। शहर में लगे हुए पेड़ प्रदूषक तत्वों को सोखने का काम करती है, इन पेड़ों ने शहर के औसत तापमान को दो डिग्री सेल्सियस तक कम किया है। इससे शहर में जैवविविधता भी बढ़ी है और वन्यजीवों को बसेरे मिल रहे हैं।

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2-पश्चिमी अफ्रीकी देश घाना की राजधानी अकरा की सरकार वर्ष 2016 से आम तौर पर कचरा उठाने वाले 600 लोगों के साथ काम कर रहा है। ये लोग पहले कचरा जमा करते थे और उसे जला देते थे, जिससे प्रदूषण होता था।लेकिन अब पहले से ज्यादा कचरा जमा हो रहा है, उसे रिसाइकिल किया जा रहा है और सुरक्षित तरीके से ठिकाने लगाया जा रहा है।

3- अगर भारत की बात करें तो, कोलकाता 2030 तक ऐसी पांच हजार बसें खरीदने की तैयारी कर रहा है जो बिजली से चलेंगी। गंगा में बिजली से चलने वाली नौकाएं लाने की भी तैयारी चल रही है। अभी तक ऐसी 80 बसें खरीदी जा चुकी हैं और अगले साल ऐसी 100 बसें और खरीदने की योजना हैं।

4- इस साल लंदन ने दुनिया का सबसे पहला अल्ट्रा लो एमिशन जोन बनाया। इसके तहत शहर में आने वाले सभी तरह के वाहनों को सख्त उत्सर्जन मानकों को पूरा करना होगा, वरना जुर्माना भरना होगा।इस योजना से कुछ महीनों में ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या घटकर एक तिहाई रह गई। लोग पैदल, साइकिल या फिर सार्वजनिक परिवहन से चलने लगे।

5- सैन फ्रांसिस्को के लोगों को उचित दामों पर अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बनने वाली बिजली मुहैया कराई गई। शहर प्रशासन को उम्मीद है कि वे 2025 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 40 प्रतिशत कटौती के अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे।

6- चीन के गुआंगजू शहर में प्सरकार ने तकरीबन 2.1 अरब डॉलर की खर्च कर शहर की सभी 11,200 बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदल दिया और उनके लिए चार हजार चार्जिंग स्टेशन भी बनावाए गए। इससे ना सिर्फ शहर में वायु प्रदूषण घटा है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी कम हुआ है। यही नहीं, बसों को चलाने पर लागत भी कम हुई है।

7- दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में लगभग दस लाख घरों की बालकनी और छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी लोगों दी गई है। स्कूल और पार्किंग सेंटर जैसी कई जगहों पर ऐसे पैनल लगाए जा रहे हैं। शहर का लक्ष्य है कि वह 2022 तक एक गीगावॉट सोलर बिजली पैदा कर पाएगा। फिलहाल इतनी ही बिजली परमाणु रिएक्टर से वहां पैदा की जा रही है।