अगले 24 घंटे में कहाँ-कहाँ होगी बारिश! जानिये क्या है मौसम विभाग की भविष्यवाणी

दिल्ली में रुक रुक कर हो रही बारिश तापमान में गिरावट दर्ज हुई है. लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है. अगस्त के महीने में बारिश ने पिछले 62 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इस बीच, राजधानी में सोमवार को हल्की से मध्यम बारिश होने एवं गरज के साथ छींटे पड़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इसकी जानकारी दी. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बारे में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि न्यूनतम तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और अधिकतम तापमान के 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है.
आईएमडी ने बताया था कि अब तक दिल्ली में अगस्त महीने में एक दिन में सबसे अधिक बारिश का रिकॉर्ड 184 मिमी का था, जो दो अगस्त 1961 को दर्ज किया गया था. दिल्ली में सफरदजंग वेधशाला के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में शनिवार सुबह आठ बजकर 30 मिनट (24 घंटे की अवधि) तक 138.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 2007 से अभी तक अगस्त महीने में हुई सबसे ज्यादा बारिश है.

वहीं, अगले 24 घंटों के दौरान पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम के कुछ इलाकों, अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है. इसके अलावा, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बाकी पूर्वोत्तर भारत में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.

ब्बात अगर उत्तराखंड की करें तो मौसम विभाग ने राज्य में 26 तक के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. लगभग सभी जिलों में बारिश, तीव्र बौछार, आकाशीय बिजली चमकने, गर्जना के साथ बारिश की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को देहरादून, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, चम्पावत, उधमसिंहनगर व बागेश्वर में कहीं कहीं तीव्र बौछार व भारी बारिश की संभावना है. सोमवार के लिए इन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है.

झारखण्ड के मौसम की बात करें तो मौसम विभाग के अनुसार पिछले चार दिनों से राज्य में मानसून की स्थिति कमजोर बनी हुई है. इसके 28 अगस्त तक कमजोर रहने की संभावना है. इसके बाद मौसम में बदलाव संभव है.

मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि लगातार बदल रहे सिनौप्टीक फीचर के कारण राज्य में मानसून की स्थिति में बदलाव हुआ है. दक्षिण पूर्व मानसून के टर्फ पूरी तरह से हवा की दिशा से प्रभावित होते हैं। ऐसे में 28 अगस्त के बाद इसमें बदलाव संभव है.