प्रदुषण के नाम लाखों रूपये वसूले गये, खर्च करने में कंजूसी क्यों कर रही है दिल्ली सरकार?

दिल्ली में प्रदुषण कितनी बड़ी संमस्या है इस बात को दिल्ली वालों से भलीभांति कौन समझ सकता है?? ओडइवन, रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ जैसे अभियान चलाये जाते रहे हैं.. कम्पनियों पर कानून का पालन ना करने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है… पर्यावरण कर भी इकट्ठा किया जाता है लेकिन सरकार इन पैसों का कर क्या करही है इसका एक नमूना एक रिपोर्ट से सामने आया है.

दरअसल द गार्जियन की एक RTI  से खुलासा हुआ है कि पर्यावरण के नाम करोड़ो रूपये जमा करने वाली केजरीवाल सरकार इन पैसों का इस्तेमाल तक नही कर पा रही है. द संडे गार्जियन की खबर के अनुसार केजरीवाल सरकार ने बीते चार साल में पर्यावरण के नाम पर 883 करोड़ रुपए इकट्ठे किए हैं। लेकिन, प्रदूषण रोकने पर इस राशि का केवल 1.6 फीसदी ही खर्च किया गया है। यानी 883 करोड़ रुपए में से केवल 141,280,000 रुपए खर्च किए गए हैं।

द गार्जियन को दिए गये जवाब में विभाग द्वारा जानकारी दी गयी है कि दिल्ली सरकार ने साल 2017 में पर्यावरण कर के नाम पर 503 करोड़ रुपए, साल 2018 में 228 करोड़ रुपए और साल 2019 में 110 करोड़ रुपए इकट्ठा किए। इसके अलावा सरकार पर्यावरण उपकर के नाम पर साल 2020 में 4 करोड़ रुपए जमा कर चुकी है.. लेकिन दिल्ली सरकार ने पिछले चार सालों में सिर्फ 15 करोड़ 58 लाख रुपए पर्यावरण संरक्षण और साफ हवा के लिए खर्च किया है. वहीँ साल 2017 में सरकार ने इकट्ठा हुए पर्यावरण कर का एक भी पैसा इस्तेमाल नही किया है. आपको बता दें कि पर्यावरण के नाम पर वसूले गये करोड़ों रुपयों में सबसे ज्यादा भागीदारी उन ट्रकों की है जो सामान लेकर दिल्ली में घुसते हैं और उनसे पैसा वसूला जाता है लेकिन इनका इस्तेमाल सरकार सही ढंग से नही कर रही है द गार्जियन को दी गयी RTI के जवाब में दिल्ली सरकार ने जो जवाब दिए हैं उससे तो यही लगता है..ऐसा नही है कि दिल्ली सरकार के इस रवैये पर कभी सवाल नही उठाया गया.. साल 2017 में कांग्रेस ने आप सरकार की खिलाफ मोर्चा खोला था.. कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने उस समय आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार फंड का सही प्रयोग नहीं कर पा रही है और न ही ट्रांसपोर्ट सुविधा सुधार रही है।

यहाँ आपको ये बताना जरूरी है कि साल 2018 में इकट्ठा किये गये कर में से 15 लाख रुपए एनएमवी (नॉन-मोटर व्हीकल) लेन के सुधार और उसके रखरखाव के लिए खर्च किए गए थे और शहर में मार्शल के रूप में तैनाती के लिए 43 करोड़ रुपए खर्च किया गया। कि साल 2017 में आम आदमी पार्टी सरकार ने हाइड्रोजन पावर बस लाने का वादा किया था, लेकिन आरटीआई जवाब में इसके बारे में जवाब देते हुए कहा गया है कि साल 2019 तक इस पर सिर्फ 15 करोड़ खर्च हुआ है और 265 करोड़ रुपए दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट प्रणाली के सुधार के लिए खर्च किया गया है।

अक्सर दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण को रोकने के लिए कदम उठाये जाते हैं लेकिन लेकिन उन कदमों से दिल्ली को फायदा क्या हुआ इसका जवाब कोई नही देना चाहता.. पंजाब हरियाणा या फिर पड़ोसी राज्यों पर सहयोग ना करने का आरोप लगाकर अक्सर दिल्ली सरकार अपना बचाव करती नजर आती है लेकिन पर्यावरण केनाम पर वसूले गये पैसों का उपयोग जब दिल्ली के प्रदुषण को ही रोकने के लिए ना किया जा रहा तो सवाल तो उठेंगे ही…