कोरोना के बीच इस महामारी से परेशान हैं कई राज्यों के लोग! करोड़ों का हो सकता है नुकसान

राजस्थान (Rajasthan), गुजरात (Gujarat), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) जैसे राज्यों के लोगों पर कोरोना के साथ एक और महामारी ने हमला कर दिया है… कोरोना के अलावा देश में महामारी फैलाने वाले हैं बाहर से आये टिड्डे.. जी हाँ टिड्डो ने देश के कई राज्यों में हमला कर दिया है. टिड्डों की संख्या और उनसे होने वाले नुकसान परेशान करने वाले है… टिड्डियों का दल कैसे तबाही मचाता है? एक दिन में कितना सफर कर लेता है? कितनी जल्दी खेत को नुकसान पहुंचा जाता है? इससे निपटने के उपाय क्या है? आइये इसी सालों के जवाबों पर बात करते हैं.

पिछली बार साल 1993 में टिड्डियों ने सबसे बड़ा हमला किया था लेकिन इस बार का हमला टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.  वैसे टिड्डियों की दुनिया भर में 10 हज़ार से ज़्यादा प्रजातियां बताई जाती हैं, लेकिन भारत में मुख्य तौर से चार प्रजातियां रेगिस्तानी टिड्डा (Schistocerca gregaria), प्रव्राजक टिड्डा (Locusta migratoria), बम्बई टिड्डा (Nomadacris succincta) और पेड़ वाला टिड्डा (Anacridium) ही सक्रिय ही रहती हैं. लेकिन एफएओ की माने तो रेगिस्तानी टिड्डे दुनियाभर में की दास फीसदी लोगों की जिन्दगी को प्रभावित कर देते हैं.. इसका मतलब यही हुआ कि रेगिस्तानी टिड्डे बेहद खतरनाक होते हैं.

टिड्डियों का झुंड एक दिन में 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से करीब 200 किलोमीटर तक का सफ़र तयकर सकते हैं . आसमान में उड़ते इन टिड्डी दलों में दस अरब टिड्डे तक हो सकते हैं. एफएओ के मुताबिक एक वर्ग किलोमीटर में फैले दल में करीब 4 करोड़ टिड्डियां होती हैं, जो एक दिन में इतने वज़न का भोजन कर लेती हैं, जितने में हजारों लोगों का पेट भरा जा सकता है. टिड्डे हजारों या लाखों के झुण्ड में आते हैं और आकर पेड़ों, पौधों या फसलों के पत्ते, फूल, फल, बीज, छाल और फुनगियाँ सभी खा जाते हैं. ये इतनी संख्या में पेड़ों पर बैठ जाते हैं कि उनके भार से पेड़ टूट भी सकता है..कुछ दिन पहले झांसी में टिड्डों ने हमला किया था तब झांसी के डीएम ने कहा कि शहर में 90 लाख टिड्डियों ने हमला किया था, यानी इतनी टिड्डियां मिलकर करीब 9000 किलोग्राम वज़न का भोजन खा जाती हैं. ये टिड्डे किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं लोगों के घरों में घुस जा रहे हैं.

अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतने टिड्डे भारत में आये कहाँ से? जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक़ इस साल के शुरूआती महीनों में टिड्डियों ने अफ्रीका में खास तौर से केन्या और इथियोपिया में कहर ढाया था. इसके बाद अरबी देशों के रास्ते से टिड्डी दलों ने यहां तक का सफर किया. ये टिड्डीयों का झुण्ड ईरान के रास्ते पाकिस्तान से होते हुए भारत पहुंचे हैं. पहले पंजाब, राजस्थान में फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद हमलावर टिड्डियों झासी और जय पुर पहुंचे..  टिड्डियों की तिनी बड़ी संख्या की वजह को ग्लोबल वार्मिंग माना जा रहा है. कहा जाता है कि टिड्डे नमी वाले इलाके में पनपते हैं. टिड्डी दलों की तादाद और हमले बढ़ने का कारण बेमौसमी बारिश को माना जा रहा है.  दरअसल लाल सागर से अरबी प्रायद्वीप की बात हो या फिर पाकिस्तान और भारत की, पिछले एक साल के दौरान लगभग हर महीने बारिश हुई. जिससे नमी बरकारार रही और ये टिड्डे पंपनते गये.. और अब ये भारत के किसानों और लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. कुछ समय पहले ही जब टिड्डियों ने गुजरात और राजस्थान में हमला किया था तब 1.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को नुकसान पहुंचाया था. जानकारों का कहना है कि अगर इनपर काबू नही पाया गया तो 8 हजार करोड़ रूपये का नुकसान हो सकता है. हालाँकि अभी तक टिड्डियों से हुए नुकसान के बारे में कोई जानकारी नही है.

दुनिया भर में हर साल टिड्डियों के कारण अरबों डॉलर की फसलें बर्बाद हो जाती हैं. सिर्फ अमेरिका में हर साल ​टिड्डियों के हमले से डेढ़ अरब डॉलर का नुकसान होता है.

दरअसल टिड्डियाँ हवा और चक्रवात के साथ अपना रुख बदलती जाती है.. और अफ्रीका में जब इनका भोजन कम पड़ने लगा तो हवा के साथ कई देशों से होते हुए भारत पहुँच गयी है.. साल के शुरुवात से ही इन टिड्डियों का आतंक या ये महामारी देश के कई राज्य झेल् रहे हैं.

एक बार टिड्डियो ने हमला कर दिया तो भारत में इसे रोक पाना मुश्किल होता है.. क्योंकि इनपर बड़े पैमाने पर हवाई कीटनाशक छिडकाव या बड़े पैमाने पर कीटनाशक का छिडकाव करना होता है जिसके लिए भी भारत तैयार नही है.. या इतने बड़े पैमाने पर छिडकाव के लिए कोई संयन्त्र नही है.

इसके साथ टिड्डियों की संख्या को कम करने के लिए उनके अण्डों को नष्ट करना, टिड्डियों को खाने वाले पक्षियों को पालना और प्राकृतिक छिडकाव किये जा सकते हैं जिससे टिड्डे यहाँ से भागे या फिर नष्ट हो जाये.