देश के कई हिस्सों में लम्पी वायरस का कहर

कोरोना वायरस के बाद अब जनता मंकीपॉक्स से जूझ रही है. मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को लेकर जनता परेशान ही थी कि अब देश में एक नई बीमारी ने दस्तक दे दी है देश में लंबी स्कीन डिजिज (Lumpy Skin Disease) ने टेंशन बढ़ा दी है. मवेशियों में फैल रही इस बीमारी के कारण गुजरात और राजस्थान के कई जिले प्रभावित हैं।

जानलेवा है लम्पी वायरस

 यह बीमारी कितनी खतरनाक है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की राजस्‍थान और गुजरात में कई पशु इस बीमारी की चपेट है आ चुके है। इस बीमारी की वजह से कई पशुओ की मौत हो चुकी है और कई इस बीमारी से संक्रमित है।  राजस्थान के साथ साथ अब यह वायरस गुजरात में भी दुधारू पशु को अपना निशाना बना रहा है। लंपी स्किन डिसीज नामक इस बीमारी से गाय और भैंसे बड़ी संख्या में बीमार हो रही हैं. इसका सबसे ज्यादा असर दुधारू पशुओं पर दिख रहा है। इस बीमारी का कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है, जिसकी वजह से ये तेजी से मवेशियों को अपना निशाना बना रही है। 

राजस्थान में हुई इतनी मौते

राजस्थान में संक्रामक चर्म रोग से अब तक 4000 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है जबकि 90,000 से अधिक मवेशी संक्रमित हुए हैं। मरने वाले मवेशियों में अधिकांश गाये हैं। यह जानलेवा वायरस राजस्थान के १६ जिलों में फ़ैल गया है।

सबसे ज्यादा इन जिलों में फैला वायरस

इस संक्रामक गांठदार चर्म रोग वायरस (एल‍एसडीवी) रोग को लंपी नाम दिया गया है. अब तक राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, पाली, सिरोही, बीकानेर, चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, अजमेर, नागौर, जयपुर, सीकर, झुंझुनू और उदयपुर जिलों में यह बीमारी पशुओं में देखी गई हैं.

गुजरात में 2000 पशुओं की मौत

यह बीमारी अफ्रीका मूल की बताई जा रही है। वहां इसका पहला केस 1929 में सामने आया था। पाकिस्तान से भारत आई यह बीमारी राजस्थान ही नहीं गुजरात में भी कहर बरपा रही है। गुजरात में अब तक इस बीमारी से 2000 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। 58,000 से ज्यादा पशु इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं।

गुजरात के यह जिले है सबसे ज्यादा प्रभावित

 गुजरात के कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका, राजकोट, पोरबंदर, मोरबी मवेशियों को हो रही इस खतरनाक बीमारी से प्रभावित हैं. सुरेंद्रनगर, अमरेली, भावनगर, बोतड, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, बनासकांठा, पाटन, सूरत, अरावली और पंचमहल जिले के मवेशियों को भी ये बीमारी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है।

मध्यप्रदेश में लंपी वायरस की एंट्री

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में भी लंपी वायरस के लक्षण पशुओं में देखने को मिले हैं। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जिले के ग्राम सेमलिया और बरबोदना में पशुओं में बीमारी के लक्षण मिलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने गांवों में जाकर जांच शुरू कर दी है। अब तक 38 पशुओं में वायरस के लक्षण पाए गए हैं। उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए टीका द्रव्य शीघ्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था गुजरात की कंपनी से चर्चा करके की जा रही है।

केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आयी

राजस्थान  और गुजरात के पालतू पशुओं (खासकर गायों में) पर ‘लम्पी वायरस’ ने कहर बरपाया हुआ है। राजस्थान और गुजरात की बात करें तो इस वायरस से दोनों राज्यों में दस हजार से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी हैं, वहीं दो लाख से ज्यादा गाय इस वायरस से संक्रमित हैं।

पशुओं को निशाना बनाने वाले इस खतरनाक वायरस (Lampi Virus) के संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार और राज्यों की सरकारें अलर्ट मोड पर आ गई है। केंद्रीय पशुपालन मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा है कि, केंद्र सरकार राज्य में किसी भी आपदा से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए राज्यों को स्टेट डिजास्टर रेस्पोंस फंड (SDRF) में अपने 75% हिस्से के रूप में मदद करती है। राजस्थान सरकार आपदा की रिपोर्ट तैयार करें एवं उनकी क्षतिपूर्ति के लिए इस फंड का उपयोग करें। अगर यह फंड कम रहता है तो राज्य सरकार नेशनल डिजास्टर रेस्पोंस फंड (NDRF) में से राशि आवंटित करने के लिए प्रस्ताव भेजे, केंद्र सरकार आमजन व किसान हित में राज्य सरकार की आगे भी मदद करेगी।

पाकिस्तान के रास्ते आई ये बीमारी

लंपी स्किन डिजीज नाम की ये बीमारी गुजरात और राजस्थान में कहर बरपा रही है. इस बीमारी को लेकर राजस्थान के अधिकारियों अधिकारियों का कहना है कि ये संक्रामक रोग पड़ोसी पाकिस्तान के रास्ते अप्रैल महीने में भारत आया था. इस बीमारी का ओरिजिन अफ्रीका बताया जा रहा है. लंपी बीमारी का पहला केस अफ्रीका में 1929 में सामने आया था.।

ऐसे फैलता है वायरस

अधिकारियों के अनुसार यह संक्रामक रोग रक्त चूसने वाले कीड़ों, मक्खियों की कुछ प्रजातियों और दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है. इसके प्राथमिक लक्षण में पशुओं की त्वचा पर गांठ, तेज बुखार और नाक बहना है. उन्होंइसके इलाज के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है. ऐसे में डॉक्टर्स लक्षण के आधार पर उपलब्ध दवाओं का ही उपचार में उपयोग करते हैं.।

रखें ये सावधानी

ये वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है. दूषित पानी, लार और चारे की वजह से पशुओं को ये रोग होता है. पशुओं में जब भी इस बीमारी के लक्षण दिखें तो सबसे पहले अपनी बीमार गाय-भैंसों को सबसे अलग कर दें. उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी अलग कर दें. पशुओं को रखने वाले स्थान पर साफ-सफाई रखें. अगर ऐसा नहीं किया गया तो अन्य आपके अन्य पशु इस बीमारी से पीड़ित होकर जान गंवा सकते हैं.