अब नहीं जाएगी मलेरिया से किसी की जान, जल्द आ रही है मलेरिया की वैक्सीन

ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से तैयार मलेरिया की नई वैक्‍सीन को दुनिया की सबसे प्रभावी वैक्‍सीन करार दिया जा रहा है। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनायीं गयी वैक्सीन एक ऐसी बूस्टर वैक्सीन है जो इस बीमारी में 80 फीसदी तक असरकारी मानी जा रही है। शोधकर्ताओं ने वैक्सीन का नाम R21/मैट्रिक्स-एम दिया है. उन्होंने 2बी फेज के अध्ययन के नतीजों के बाद यह दावा किया है। उम्मीद है की अगले साल तक यह वैक्सीन बाजार में आ जाएगी।

अब बच सकेगी जान

मलेरिया की वैक्सीन का विकिसत होना काफी बड़ी खुसखबरी है। अब बच्चो की जान मलेरिया से नहीं जाएगी और उन्हें बचाया जा सकेगा। मलेरिया की प्रभावी दवाई को तैयार करने में एक सदी से ज्‍यादा का वक्‍त लग गया है। मच्‍छरों से फैलने वाली यह बीमारी बहुत ही जटिल मानी जाती है। आर21/मैट्रिक्स-एम की तीनों प्रारंभिक खुराक के एक साल बाद लगाई गई बूस्टर खुराक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मलेरिया वैक्सीन टेक्नोलॉजी रोडमैप लक्ष्य पर खरी उतरती है, जिसके तहत टीके का कम से कम 75 फीसदी प्रभावी होना जरूरी है।

409 बच्‍चों पर हुआ ट्रायल

बुर्किना फासो के 450 बच्चे शामिल हुए, जिनकी उम्र पांच से 17 महीने के बीच है. इन्हें तीन समूहों में बांटा गया. पहले दो समूहों में शामिल 409 बच्चों को मलेरिया रोधी टीके की बूस्टर खुराक लगाई गई. वहीं, तीसरे समूह के बच्चों के रेबीज से बचाव में कारगर टीका दिया गया। बूस्टर खुराक दिए जाने के 28 दिनों के बाद शुरुआती वैक्सिनेशन के बाद एंटीबॉडी सामान्य स्तर पर पहुंच गई थी। शुरुआती तीन खुराक और एक बूस्‍टर के बाद 80 फीसदी तक की सुरक्षा मिलती है।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया  के पास है टीके का लाइसेंस

मलेरिया के इस टीके का लाइसेंस सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के पास है. साल 2021 में पूर्वी अफ्रीका के बच्चों पर किए गए अनुसंधान में यह टीका मलेरिया के खिलाफ 12 महीने तक 77 फीसदी सुरक्षा मुहैया कराने में प्रभावी मिला था.

ताजा रिसर्च में अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि आर21/मैट्रिक्स-एम की तीनों प्रारंभिक खुराक के एक साल बाद लगाई गई बूस्टर खुराक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मलेरिया वैक्सीन टेक्नोलॉजी रोडमैप लक्ष्य पर खरी उतरती है, जिसके तहत टीके का कम से कम 75 फीसदी प्रभावी होना जरूरी है.