यूरोप में बड़ी मणिपुर के “काले चावल : चाक हाओ ” की मांग, मिला GI का टैग

दुनियाभर में चावल मनुष्य का सबसे पसंदीदा और सबसे अधिक खाया जाने वाला अन्न है। भारत में चावल सबसे लोकप्रिय खाद्य सामग्री है।  भारत में चावल के कई प्रकार पाए जाते है और आप इन्हे २० रूपए प्रति किलो से लेकर ५०० रुपये प्रति किलो तक ले सकते है। लेकिन आज हम आप को ऐसे चावल के बारे में बतायेगे जो शायद ही आज से पहले आप लोगो ने सुना होगा।  काला चावल एक ऐसा अनाज, जिसे आज भी ज्यादा लोग नहीं जानते हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में पाया जाने वाला काला चावल पोषक तत्वों का खजाना है। इसे मुख्यतौर पर मणिपुर में उगाया जाता है। और अब मणिपुर के इस चावल की मांग यूरोप में बढ़ गयी है।

एक मीट्रिक टन चावल निर्यात हुआ यूरोप

यूरोप इन दिनों मणिपुरी ब्लैक राइस का मुरीद हो चला है। स्थानीय भाषा में चाक हाओ के नाम से प्रसिद्ध इस सुगंधित पहाड़ी ब्लैक राइस की मांग यूरोपीय देशों में काफ़ी बढ़ रही है। पहली बार एक मीट्रिक टन जैविक मणिपुरी काला चावल इम्फाल से यूरोप को निर्यात किया गया है। इस कंसाइन्मेंट को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 12 अगस्त को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

क्या है काला चावल

चाखाओ अमुबी मणिपुर का  एक प्रकार का चिपचिपा काला चावल है. चाखो का अर्थ स्वादिष्ट होता है जबकि अंबुई का अर्थ काला होता है. यह आमतौर पर विशेष अवसरों पर और त्योहारों के अवसर पर चढ़ाया जाता है. पकाने के बाद, यह काले से बैंगनी रंग का हो जाता है और इसमें थोड़ा अखरोट जैसा स्वाद होता है. माना जाता है कि काले चावल की खेती तब शुरू हुई जब मणिपुर के शुरुआती लोग यहां आए। 

इस चावल में ऐसा क्या है खास

माना जाता है की यह चावल मिनरल्स और विटामिन्स की खान है और इसी के चलते यूरोप में इसकी मांग बढ़ गयी है। इस चावल में वसा नहीं होता है।  इसमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते है। स काले चावल के खाने से गंभीर ऐथिरोस्क्लेरोसिस बीमारी, उच्च रक्तचाप, तनाव, उच्च कोलेस्ट्रॉल, आर्थराइटिस, कैंसर और एलर्जी सरीखी बीमारियों से पीडि़तों को बचाव एवं राहत प्रदान करता है। काला चावल मोटापा कम करने के लिए बेहद लाभदायक हैं। दिल को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए भी ये सहायक है। इसके 100 ग्राम में कार्बोहाइड्रेट-34, प्रोटीन-8.7, आयरन-3.5, फाइबर-4.9 और सर्वाधिक एंटी ऑक्सिडेंट मौजूद रहता है।

मिला GI टैग

मणिपुर ब्लैक राइस को GI टैग दिया गया है। यह टैग स्पेशल क्वालिटी और पहचान वाले उत्पाद (जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है) को दिया जाता है. जिस भी किसी क्षेत्र (देश, प्रदेश और टाउन) को यह टैग दिया जाता है, उसके अलावा किसी और को इस नाम को इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है।  भारत में अब तक लगभग 361 प्रोडक्ट्स को GI टैग मिल चुका है।  खास बात यह है की GI टैग जीवन भर के लिए नहीं मिलता। इसकी वैधता सिर्फ १० साल की होती है उसके बाद इस टैग के लिए फिर से अप्लाई करना होता है। यह टैग ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री के द्वारा दिया जाता है जो कि उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के द्वारा दिया जाता है।