पाकिस्तान से भारत आये इन लोगों ने हासिल किया बड़ा मुकाम, झेलना पड़ा था बंटवारे का दर्द

भारत पाकिस्तान के बंटवारे का दर्द लाखों लोगों को झेलना पड़ा था.. हजारों की संख्या में आज भी इस बंटवारे से पीड़ित है और इस दर्द आज भी झेल रहे हैं. बंटवारे की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान से भारत आये और फिर भारत से पाकिस्तान चले गये. जनवरी 1948 में कराची में दंगे भड़क उठे, जिसने वहां के हिंदुओं से लेकर सिंधियों तक को बाहर खदेड़ दिया. बड़ी संख्या में लाखों लोगों को ना चाहते हुए भी पाकिस्तान छोड़ना पड़ा था.

हालाँकि बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग थे जो पाकिस्तान से भारत आये और भारत के अलग अलग शहरों में आकर बस गये. यहाँ आकर शून्य से उन्होंने अपना व्यापार शुरू किया और आज देश के बड़े लोगों में उनका नाम शामिल है.

हम कुछ इन्हीं चेहरे से आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं जिन्हें पाकिस्तान छोड़कर भारत आना पड़ा और यहाँ आकर उन्होंने अपना नाम बनाया, व्यापार स्थापित किया और वे बन गये अरबपति

इसलिस्ट में सबसे पहला नाम है निरंजन हीरानंदानी

हीरनंदानी ग्रुप के  मालिक निरंजन हीरानंदानी के पिता और पद्मश्री विजेता लखुमल हीरानंद हीरनंदानी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जन्मे और वहीं से अपना काम शुरू किया था. हालाँकि विभाजन का दर्द इन्हें भी झेलना पड़ा… परिवार में जितने भी सदस्य बचे थे उनके साथ भारत आ गये और भारत आकर उन्होंने टेक्सटाइल के छोटे से व्यापार से शुरुआत की और साल 2017 में उनका नाम फोर्ब्स की लिस्ट में आया, जो दुनियाभर के 100 अमीरों की बात करती है.

बॉलीवुड में भी पाकिस्तान से आये लोगों ने जमकर नाम कमाया और एक नया मुकाम हासिल किया. अभिनेत्री करीना कपूर को तो आप जानते ही होंगे लेकिन क्या आप करीना कपूर का मान बबीता कपूर को जानते हैं. करीना कपूर की मां बबीता कपूर. बबीता भी पाकिस्तान के कराची के बर्न्स रोड में हुआ था. उनके पिता हरि शिवदासानी हिन्दू सिंधी परिवार से थे, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आ गए

कॉमेडियन असरानी ने आपको फिल्मों में खूब हंसाया होगा लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि बचपन में ही असरानी को बंटवारे का दर्द झेलना पड़ा था. उस वक्त उनकी उम्र महज आठ साल थी जब वे अपने परिवार के साथ पाकिस्तान के सिंध से भारत आ गये और भारत में उन्होंने नाम कमाया.

देश के जाने माने वकीलों में से एक थे रामजेठ मलानी.. जेठमलानी का जन्म ब्रिटिश शासन के शिकारपुर शहर में हुआ जो आजकल पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में है. साल 1923 में जन्मे जेठमलानी ने अपना करियर पाकिस्तान में एक लॉ प्रोफेसर के तौर पर शुरू किया था लेकिन जब पाकिस्तान में दंगे भड़के तो उन्हें पाकिस्तान छोड़कर भारत आना पड़ा और यहाँ आकर उन्होंने वकालत में एक ऐसा नाम स्थापित किया जो हमेशा याद किया जायेगा.

ये ये तो ये है मूलतः पाकिस्तान में जन्में वो भारतीय जिन्होंने बंटवारे का दर्द झेला और भारत में आकर एक नया मुकाम हासिल किया.