फेसमास्क- आपको वायरस से बचाता है मास्क लेकिन देखिये कैसे ले रहा है जीवों की जान

फेसमास्क.. जिसके जरिये हम कोरोना वायरस से खुद का बचाव करते है लेकिन अब ये मास्क जीवों की जान ले रहा है..कोरोना वायरस अपने साथ इतनी मुसीबतें लेकर आया जिसे ख़त्म होने में कई साल लग जायेंगे!  कोरोना का कचरा अब एक बड़ी मुसीबत बन रहा है ना सिर्फ धरती के लिए बल्कि समुन्द्र के लिए भी… ना सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि जीव जंतू जानवरों के लिए भी कोरोना का कचरा किसी बड़ी मुसीबत से कम नही है…आप इस मूसीबत का अंदाजा तब लगा पायेंगे जब आप इस वीडियो को पूरा देखंगे..

आपको ये जानकर हैरानी होगीकि लगभग 150 करोड़ इस्तेमाल किए गए फेस मास्क विभिन्न माध्यमों के जरिए इस साल समुद्र में पहुंचने वाले हैं. हॉन्गकॉन्ग की पर्यावरण संरक्षण संस्था ओशंस एशिया ने इस संबंध में एक ग्लोबल मार्केट रिसर्च के आधार पर एक रिपोर्ट जारी की है… भास्कर में लिखी गयी रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोनावायरस की वजह से इस साल लगभग 5200 करोड़ मास्क बने हैं। परंपरागत गणना के आधार पर इसका 3 फीसदी समुद्र में पहुंचेगा। ये सिंगल यूज फेस मास्क मेल्टब्लॉन किस्म के प्लास्टिक से बना होता है। इसके कम्पोजिशन, खतरे और इंफेक्शन की वजह से इसे रिसाइकिल करना काफी मुश्किल होता है। यह हमारे महासागरों में तब पहुंचता है जब यह कूड़े में होता या लापरवाही से कहीं भी फेंक दिया जाता है या जब हमारा कचरा प्रबंधन सिस्टम अपर्याप्त या फेल हो जाता है। प्रत्येक मास्क का वजन तीन से चार ग्राम होता है।


ऐसी स्थिति में लगभग 6800 टन से ज्यादा प्लास्टिक प्रदूषण पैदा होगा और इसे खत्म होने में लगभग 450 साल लगेंगे। रिपोर्ट के साथ ये भी बताया गया है कि मास्क को कान में लगाने के लिए लगा रबर या प्लास्टिक रस्सी का जोइस्तेमाल होता है वो भी समुन्दी जीवों के लिए बड़ा ख़तरा है.. अलग अलग जगहों पर ऐसी कई मछलियाँ मरी हुई  पायी गयी जिनके पेट में मास्क या फिर मास्को को कान में फंसाने वाली रस्सी पायी गयी.

ऐसे में लोगों को सुझाव दिया गया है कि धुल सकने वाले कपड़े के मास्क का प्रयोग करें या फिर फेंकने से पीला मास्क में लगी रस्सी को निकाल दें… ताकि समुन्दी जीवों की जान के खतरे को कम किया जा सके