कैबिनेट का बड़ा फैसला, 5 राज्यों की यह जातियां अनुसूचित जनजाति में शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दशकों से अधिकारों से वंचित उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश सहित पांच राज्यों से जुड़ी करीब डेढ़ दर्जन जनजातियों को एक बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में कई आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इन जातियों को अब अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा मिलेगा। इसके साथ ही वह इससे जुड़े सभी तरह का लाभ भी ले सकेंगे। इस फैसले के बाद देश में अनुसूचित जनजातियों की संख्या 705 से बढ़कर 720 हो गई है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में ST की जनसंख्या 10.43 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का 8.6% है।

जातियां जिन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया 

छत्तीसगढ़ राज्य की  भुईंया, भूया, पंडो, धनुहार, गदबा, गोंड, कोंध, कोरकू, नगेसिया, धांगड़, सौंरा, बिंझिया जातियां , हिमाचल प्रदेश की हट्‌टी जाति, तमिलनाडु की कुरुविक्करन जाति, कर्नाटक की बेट्‌टा कुरुबा जाति और उत्तर प्रदेश की गोंड, उपजाति-धुरिया, नायक, ओझा, पठारी, राजगोंड​​​​​​ जातियां।  इन सभी जातियों की अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया है।

जनजातियों को होगा फायदा

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने मंजूरी के बाद मीडिया से कहा कि इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के ट्रांस-गिरी एरिया में बसे हट्टी समुदाय के लगभग 1.60 लाख लोगों को फायदा होगा। छत्तीसगढ़ में बृजिया समुदाय और तमिलनाडु की पहाड़ियों में रहने वाले सबसे वंचित और कमजोर समुदायों में से एक नारिकुरावर भी लाभांवित होंगे।।

अब तक नहीं मिला था दर्जा

खास बात यह है कि अलग-अलग राज्यों से जुड़ी यह जनजातियां नामों में त्रुटियों सहित दूसरे कारणों से अब तक अनुसूचित जनजाति में शामिल नहीं थीं। इसके चलते इन्हें इससे जुड़ा कोई लाभ भी नहीं मिल पा रहा था। हालांकि यह जातियां लंबे समय से खुद को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग कर रही थीं, जो अब तक अनसुनी थी।