देश में मंकीपाक्स संक्रमण पर नजर रखने को सरकार ने टास्क फोर्स का किया गठन, अब तक चार मामलों की पुष्टि

कोरोना महामारी के बाद अब मंकीपॉक्स दुनिया भर में पैर पसार रहा है। दुनिया भर के 70 से अधिक देशों के साथ भारत में भी मंकीपाक्स ने दस्त दे दी है। केंद्र सरकार ने देश में मंकीपॉक्स के मामलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। देश में मंकीपॉक्स के मामलों पर नजर रखने और संक्रमण की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले कदमों के संबंध में निर्णय लेने के वास्ते एक कार्यबल का गठन किया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस टीम का नेतृत्व नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल करेंगे. टीम के सदस्यों में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, फार्मा और बायोटेक के सचिव शामिल होंगे. ये पूरी टीम देशभर में मंकीपॉक्स के केसों पर नजर रखेगी.। 

केरल में मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीज की मौत 

भारत में अब तक मंकीपाक्स के चार मामले सामने आए हैं। इनमें तीन मामले केरल और एक मामला दिल्ली का है। हाल में संयुक्त अरब अमीरात से केरल लौटे 22 वर्षीय पुरुष की कथित रूप से मंकीपॉक्स के कारण शनिवार को मौत हो गई थी। मंकीपॉक्स से जान गंवाने वाला शख्स त्रिशूर के पुन्नियूर का रहने वाला था। सूत्रों के मुताबिक  युवक 22 जुलाई को केरल पहुंचा था और 26 जुलाई को बुखार आने के बाद अस्पताल आया। बाद में उसे लाइफ सपोर्ट पर रखा गया और शनिवार शाम को उसकी मौत हो गई।

 इसके बाद राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज ने उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। जार्ज ने बताया कि किसी अन्य देश में युवक की जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। त्रिशूर में उसने इलाज कराया था। उन्होंने कहा कि इलाज में देरी की जांच कराई जाएगी। मृतक युवक की संपर्क सूची और रूट मैप भी तैयार किया गया है। संपर्क में आए लोगों को आइसोलेशन में जाने की सलाह दी जाती है।

दिल्ली, तमिलनाडु में मंकीपॉक्स के केस मिले

बताते चलें कि देश में मंकीपॉक्स के केस मिलने से सरकार की टेंशन बढ़ गई है. अब तक केरल, तमिलनाडु और दिल्ली में मंकीपॉक्स संक्रमित मरीज मिले हैं.केरल में मंकीपॉक्स के तीन केस मिल चुके हैं. केरल में 14 जुलाई को मंकीपॉक्स का पहला केस सामने आया था. इसके चार दिन बाद 18 जुलाई को दूसरे मामले की पुष्टि हुई थी फिर 22 जुलाई को तीसरा मामला सामने आया. तीनों मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री रिकॉर्ड की थी. ये  तीनो ही मरीज यूएई से लौटे थे और वहीं किसी संक्रमित के संपर्क में आए थे 

मंकीपॉक्स को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी

पहली बार मंकीपॉक्स बीमारी 1958 में सामने आई थी. तब रिसर्च के लिए रखे गए बंदरों में यह संक्रमण मिला था. इसलिए इसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया है। दुनियाभर में तेजी से फैल रहे मंकीपॉक्स को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा कर दी है. WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा कि मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता करने वाला है। वैश्विक स्तर पर, 75 देशों में मंकीपॉक्स के 16,000 से अधिक मामले पाए गए हैं।