कोरोना से एक हजार से ज्यादा डॉक्टरों की मौत, एक दिन में 50 डॉक्टरों की गई जान

कोरोना से बचने के लोग डॉक्टर की तरफ भागते हैं लेकिन कोरोना ने डॉक्टरों के ऊपर पर प्रहार कर दिया है. महामारी के बीच खबर आई पद्म श्री से सम्मानित और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल के निधन की,जिसने सबको झकझोर दिया है. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के जरिये जुनून की हद तक लोगों की मदद में जुटे डॉ केके अग्रवाल के जाने से उनके चाहने वाले लाखों लोगों की आंखें नम हैं.

IMA के पूर्व निदेशक डॉ. केके अग्रवाल का कोरोना से लंबी लड़ाई के बाद निधन -  Padam Shri Dr K K Aggarwal passed away admitted in AIIMS COVID ICU - AajTak

भारत के मशहूर और दिलों की धड़कनों को महसूस कर लेने वाले दिल के डॉक्टर केके अग्रवाल का सोमवार रात निधन हो गया, वे लंबे समय से कोरोना से जूझ रहे थे. उनकी मेहनत और डॉक्टरी के प्रति उनके फर्ज को आप ऐसे समझ सकते हैं क‍ि कोरोना से संक्रमित होने के बाद भी उनके चेहरे पर एक श‍िकन तक नजर नहीं आ रही थी. इतना ही नहीं अस्पताल में भर्ती होने से पहले भी वो ऑनलाइन मरीजों की परेशानियां सुलझाते रहे.

सबसे दुखद बात ये है कि जो डॉक्टर लोगों की जिंदगी बचा रहे है लेकिन वे खुद को कोरोना से नही बचा पा रहे, कोरोना मरीजों के साथ रहते रहते हमारे डॉक्टर भी संक्रमित हो रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं. सिर्फ इस रविवार को ही एक दिन में कोरोना के चलते 50 डॉक्टरों की मौत हो गई. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक, देश में कोरोना की दूसरी लहर में अब तक 269 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है. इन सभी डॉक्टरों में सबसे ज्यादा जान गवाने वाले 30 से 55 साल के बीच के युवा डॉक्टर थे.

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इसमें सबसे ज्यादा बिहार में 78 डॉक्टरों की मौत हुई है. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 37 और दिल्ली में 28 डॉक्टरों, आंध्र प्रदेश में 22 डॉक्टर, तेलंगाना में 19 डॉक्टर, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में 14 डॉक्टरों की जान कोरोना की दूसरी लहर में गई है. इनमें से 3 फीसदी डॉक्टर ही ऐसे थे, जिन्होंने कोरोना वैक्सीन की पूरी डोज ली थी. भारत में टीकाकरण की शुरुआत हुए 5 महीने का वक्त गुजर गया है और अब भी देश में सिर्फ 66 फीसदी हेल्थवर्कर्स को ही टीका लगा है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि उसकी ओर से लगातार डॉक्टरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे टीका लगवा लें.साथ ही कहा है कि डॉक्टरों और प्रशासन को कहना चाहता हूं कि 6-8 घंटे से ज्यादा काम न करें.

बता दें कि इससे पहले बीते साल कोरोना की पहली लहर में देश में 736 डॉक्टरों की मौत हो गई थी. इस तरह कोरोना के कारण अब तक देश में एक हजार से ज्यादा डॉक्टरों की मौत हो चुकी है.