कोराना के कारण हुए लॉकडाउन में सबसे अधिक किसान परेशान हुए

दुमका: कोराना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन से सबसे अधिक कोई परेशान है, तो वह है किसान वर्ग. एक तो फसल लगाने के समय बीज खाद काफी ऊचे दामों में खरीकर किसी तरह फसल लगाते हैं. जब फसल तैयार हो जाता है, तो उसे बेचने के लिए बाजार उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण किसानों को उसे कोड़ी के भाव बेचने को विवश हो रहे हैं. इस तरह से किसानों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है. ताजा उदाहरण मसलिया प्रखंड के दलाही पंचायत अंतर्गत पिछली गांव का है, जहां पर लगभग 30 बीघा जमीन पर लगे मकई का फसल तैयार है. इस साल महामारी के कारण शहरों में लगाने वाले हाट बंद होने के से मकई खेती करने वाले किसान काफी परेशान हैं. किसानों ने बताया कि दुमका, कुंडहित, फतेहपुर सहित सभी छोटे बड़े बाजारों मे हटिया बंद होने के कारण तैयार फसल को कोड़ी के भाव बेचना पड़ रहा है. इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है. मकई फसल को अधिक दिनों तक खेतों में रखने से वह खराब हो जाता है.

क्या कहते हैं किसान
प्रबोध मंडल कहते हैं कि मकई तैयार हो गया है लेकिन लॉक डाउन के चलते बेचने के लिए बाजार नहीं है. इसके कारण बहुत कम दामों में मकई बेचने को विवश है. फिर भी लेने वाला कोई नहीं है.
बुधन मंडल कहते हैं कि ऊंचे दामों में बीज खाद खरीद कर मकई की खेती बहुत उम्मीद के साथ किये लेकिन अब फसल तैयार है और ग्राहक कोई नहीं है.
संतोष मंडल कहते हैं कि परिवार का एक मात्र आय का स्रोत खेती है और हर साल मकई से ठीक ठाक कमाई हो जाता है. लेकिन इस साल लॉक डाउन के कारण मकई से काफी नुकसान हो रहा है.