दुनिया को राह दिखाते मुंबई समेत ये चार बड़े शहर

दुनिया भर में अगर स्थानीय प्रशासन चाहे तो बहुत कुछ बदल सकता है।  आज हम आपको हम ऐसे ही कुछ शहरों के बारे में बता रहे है जिन्होंने अपने छोटे छोटे कदमो से दुनिया को दिखाया दिया है की बड़ी मंज़िल तक कैसे पंहुचा जा सकता है। दुनिया में इस वक्त ऐसी कम-से-कम एक दर्जन मिसालें हैं, जो बता रही हैं कि जलवायु परिवर्तन की मार से बचने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है। इनमें कुछ महानगर भी शामिल हैं। आइये जानते है इन महानगरों के बारे में

मुंबई: दक्षिण एशिया का क्लाइमेट लीडर महानगर

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर है। COP26 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक भारत को कार्बन न्यूट्रल बनाने का वादा किया। भारत की वित्तीय राजधानी कही जाने वाली मेगासिटी मुंबई इस लक्ष्य को 2050 तक हासिल करना चाहती है। समंदर तट पर बसी मुंबई बीते कुछ सालों से लगातार बाढ़ और प्रचंड गर्मी का सामना कर रही है। मुंबई को अभी 50 फीसदी बिजली कोयले से चलने वाले पावर प्लांट से मिलती है. शहर 2050 तक इसे सौर और पवन ऊर्जा से रिप्लेस करना चाहता है. इमारतों को भी उत्सर्जन मुक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ट्रांसपोर्ट पर भी फोकस है. शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को बिजली से चलने वाला बनाया जा रहा है. 2023 तक मुंबई में 2,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें उतारी जाएंगी. इसके साथ ही मुंबई के लिए जीरो लैंडफिल वेस्ट मैनेजमेंट प्लान भी बनाया गया है। 

कोपेनहेगन: दुनिया का पहला कार्बन न्यूट्रल शहर

2012 में डेनमार्क की सरकार और कोपेनहेगन प्रशासन ने कोपेनहेगन को दुनिया का पहला कार्बन न्यूट्रल शहर बनने का लक्ष्य रखा. इसके लिए समयसीमा 2025 तय की गई. डेनमार्क की राजधानी 2025 तक इस लक्ष्य को हासिल करने के करीब है।  डेनमार्क ने ग्रीन मोबिलटी और उत्पादन व खपत क्षेत्र में ऊर्जा बचाने पर जोर दिया। ऊर्जा और ईंधन के लिए कोपेनहेगन कोयले, तेल और गैस पर निर्भर है. लेकिन बीते सालों में अक्षय ऊर्जा स्रोतों से मिलने वाली बिजली की हिस्सेदारी बढ़ रही है। बिजली बचाने के लिए स्मार्ट एनर्जी ग्रिड लगाए जा रहे हैं। 2025 तक शहर के भीतर होने वाली आवाजाही का 75 फीसदी हिस्सा पैदल, साइकिल या सार्वजनिक परिवहन से तय करने का लक्ष्य है।

सिएटल और फाउबान: पर्यावरण प्रेमी समुदाय

कनाडा के महानगर सिएटल की एक आर्किटेक्चर और अर्बन प्लानिंग फर्म ‘लार्ष लैब’ रिहाइशी इमारतों वाले परिसरों को ईको डिस्ट्रिक्ट्स में बदलना चाहती है। इस कॉन्सेप्ट में इमारतें डेवलपर्स नहीं, बल्कि मकान मालिक डिजायन करते हैं. फर्म, मकान मालिकों को बताती है कि किस तरह वे कार्बन मुक्त घर बना सकते हैं। अपने कचरे को रिसाइकिल और अपसाइकिल करें. ऐसी इमारतें शुरुआत में काफी महंगी लगती हैं, लेकिन 20-25 साल के खर्च को देखें, तो ये सस्ती पड़ती हैं।

जर्मनी के फ्राइबुर्ग शहर का पड़ोसी जिला फाउबान इस मॉडल का जीता-जागता सबूत है. फ्राइबुर्ग शहर 2030 तक अपना उत्सर्जन 60 फीसदी घटाना चाहता है।

पेरिस: 15 मिनट वाला शहर

फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक 15 मिनट वाले शहर का कॉन्सेप्ट लागू किया जा रहा है। आने-जाने में खर्च होने वाले समय को कम-से-कम करने के लिए पेरिस ने कहीं भी 15 मिनट में पहुंचने का लक्ष्य रखा है। ट्रैफिक जाम के लिए बदनाम पेरिस अब हर सड़क पर साइकिल ट्रैक बना रहा है। ट्रैफिक को काबू में रख वायु और ध्वनि प्रदूषण पर भी अकुंश लगाने का इरादा है. पेरिस ने 2050 तक कार्बन न्यूट्रल होने का लक्ष्य रखा है। शहर के बाशिंदों को उनकी जरूरत की हर सुविधा 15 मिनट की पदयात्रा या साइकिल राइड पर मिलेगी. इन सुविधाओं में स्कूल, पार्क, प्लेइंग ग्राउंड, दुकानें और स्वास्थ्य सेवाएं भी शामिल होंगी।