भारत के साथ दुश्मनी लेने वाले नेपाल की जमीन पर चीन का कब्जा? सवालों से घिरे पीएम ओली

ये हम सभी जानते हैं कि नेपाल भी चीन के इशारे पर भारत के सीमा विवाद पैदा कर रहा है.. लेकिन चीन की चाल से नेपाल भी नही बच पाया और अब हालत ये है कि नेपाल में प्रधानमंत्री के खिलाफ ही आवाज उठने लगी है. आवाज उठाने वाले और कोई नही उनके ही नेता है.

दरअसल  नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की बुधवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री के.पी. ओली और पार्टी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंद एक-दूसरे का खुलकर विरोध करते नजर आए. पुष्पकमल दहल प्रचंड नेपाल के दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं. यह बैठक नेपाल की मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) के साथ तीन साल पहले हुई डील पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी. एमसीसी के साथ डील हुई थी कि वे नेपाल के कई क्षेत्रों निवेश करने वाला है. वहीँ अब नेपाल के प्रधानमंत्री पर आरोप लगाये जा रहे थे कि उन्होंने सरकार को हाईजैक कर लिया है और मनमानी तरीके से सरकार चला रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बैठक में ओली ने कहा, “मेरे अच्छे कामकाज, देश में समाजवाद स्थापित करने की कोशिशों और राष्ट्रवाद के लिए उनकी प्रतिबद्धता की भी पार्टी के नेता सराहना नहीं कर रहे हैं.” ओली ने प्रचंड को जवाब देते हुए कहा, “मुझे अपमानित करके आप यह मत समझिए कि आपका कद ऊंचा हो गया है.”

वहीँ भारत को तेवर दिखाने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री ओली चीन द्वारा जमीन हथियाए जाने पर खामोश नजर आ रहे हैं. दरअसल, हाल ही में नेपाल के सर्वे विभाग की ओर से ही एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें चीन के अतिक्रमण को लेकर आगाह किया गया है.

नेपाली कांग्रेस के सांसद देवेंद्र राज कंडेल, सत्यनारायण शर्मा खनाल और संजय कुमार गौतम ने बुधवार को प्रतिनिधि सभा सचिवालय में संयुक्त रूप से प्रस्ताव दर्ज किया. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि सीमा पर लगे 98 पिलर को नष्ट कर चीन ने नेपाल के भूभाग पर कब्जा किया है जिसे न्यूज चैनलों में भी प्रमुखता से दिखाया जा रहा है. सरकार चीन के कब्जे वाले नेपाल के भूभाग को वापस लाने के लिए किए गए प्रयासों से सदन को अवगत कराए. साथ ही, इन इलाकों की स्थिति और वास्तविक अतिक्रमित प्रदेशों और गांवों के बारे में भी सदन को जानकारी दे. यहाँ आपको ये भी बता दें किनेपाल के कृषि मंत्रालय के सर्वे विभाग ने एक रिपोर्ट तैयार की है जिसमें ये कहा गया है कि चीन नेसड़क निर्माण के नाम पर नेपाल की जमीन पर कब्जा कर रहा है.. इतना ही नही नदियों का बहाव मोड़कर चीन नेपाल को नुकसान पहुंचा रहा है.. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर ये सब कुछ और वक्त के लिए जारी रहा तो नेपाल का अधिकतर हिस्सा तिब्बत के क्षेत्र में चला जाएगा.

हालाँकि चीन के इशारे पर भारत के साथ दुशमनी मोल लेने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री ओली अब चीन की गुस्ताखी पर खामोश हैं.. इस वजह से भी अब नेपाल में ओली के खिलाफ विरोध की आवाज सुनी जा सकती है.