नीति आयोग के स्टेट एनर्जी एंड क्लाइमेट इंडेक्स में गुजरात नंबर 1, छत्तीसगढ़, MP समेत ये राज्य रहे फिसड्डी

हाल में ही नीति आयोग के राज्य ऊर्जा और जलवायु इंडेक्स-राउंड 1 (State Energy and Climate Index) में गुजरात ने बड़े राज्यों में नंबर 1 रैंक हासिल की है। गुजरात ने 50.1 अंक स्कोर किए हैं। हालांकि गुजरात सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य है, लेकिन पर्यावरणीय स्थिरता और नई पहल के मामले में इसके प्रदर्शन में सुधार की जरूरत है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के बाद केरल और पंजाब का स्थान है।  इस सूची में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्य सबसे पीछे रहे। छोटे राज्यों में गोवा इंडेक्स में सबसे ऊपर है।  उसके बाद त्रिपुरा और मणिपुर का स्थान है। 

झारखण्ड को मिला 26 वा स्थान 

नीति आयोग ने झारखंड को ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण प्रयास के मामले में पुरे देश में 26 वा स्थान मिला है। स्टेट एनर्जी एंड क्लाइमेट इंडेक्स-राउंड की गणना में यह बात निकल कर सामने आयी है। निति आयोग ने पुरे देश के अलग अलग राज्यों के ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाये हुए कदम का अध्ययन किया और उस के आधार पर रिपोर्ट तैयार करी है। इस रिपोर्ट में 6 पैरामीटर्स पर 27 इंडीकेटर्स है। इस रिपोर्ट में क्षेत्रफल और भौगोलिक के आधार पर राज्यों को बाटा गया है। बड़े राज्यों में गुजरात, पंजाब, केरला है। बड़े राज्यों में गुजरात पहले स्थान पर है वही छोटे राज्यों में गोवा पहले स्थान पर है। केंद्रशासित राज्यों की श्रेणी में पहले स्थान पर चंडीगढ़ और दुसरे स्थान पर दिल्ली है।

क्या है झारखण्ड के 26 वें नंबर पर आने का कारण

आइये जानते है की झारखण्ड को किन कारणो से रिपोर्ट में 26 वा स्थान मिला है।

क्लीन एनर्जी के लिए कमजोर प्रयास :

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि झारखंड में 2019-20 के दौरान क्लीन एनर्जी की दिशा में कमजोर प्रयास हुआ है. क्लीन कुकिंग फ्यूल आपूर्ति में झारखंड को 5.5 अंक मिला है. इस दौरान गैर पारंपरिक ऊर्जा के क्षेत्र में किये गये प्रयासों में शून्य अंक मिला है. सीएनजी गाड़ियों की संख्या में वृद्धि के मामले में 33.7 अंक मिला है.

पर्यावरण संरक्षण के लिए नये प्रयास कम :

नीति आयोग ने पाया है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बहुत ही कम नये प्रयास हुए हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में मात्र 11.9 अंक मिला है. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन के मामले में 16 अंक मिला है.

प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत की स्थिति खराब :

ऊर्जा की पहुंच, सामर्थ्य और भरोसा के मामले में तय इंडिकेटर में झारखंड की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. आज भी प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में झारखंड की रेटिंग मात्र 6.3 ही है.

पर्यावरण स्थिरता की स्थिति भी अच्छी नहीं :

झारखंड में पर्यावरण स्थिरता के लिए तय इंडिकेटर की स्थिति भी अच्छी नहीं है. जीएसडीपी में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले इंडिकेटर में झारखंड को 41.7 अंक मिला है.

झारखंड की स्थिति खराब :

झारखंड में डीबीटी ट्रांसफर के साथ-साथ टीओडी ) और टीओयू (टाइम ऑफ यूज) टैरिफ के उपयोग के मामले में शून्य रेटिंग की गयी है. रेगुलेटरी परिसंपत्ति मामले में झारखंड की रेटिंग शत-प्रतिशत रही है. टैरिफ की जटिलता दूर करने में झारखंड की रेटिंग 95.7 है. ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस के मामले में झारखंड की रेटिंग 67.8 है.

किस आधार पर तय होता है पैरामीटर

स्टेट एनर्जी एंड क्लाइमेट इंडेक्स (एसईसीआई) राउंड-1 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह मानकों पर रैंक करता है – डिस्कॉम का प्रदर्शन; पहुंच सामर्थ्य और ऊर्जा की विश्वसनीयता; स्वच्छ ऊर्जा पहल; ऊर्जा दक्षता; पर्यावरणीय स्थिरता; और नई पहल। इन मापदंडों में कुल 27 संकेतक शामिल हैं। SECI राउंड-1 स्कोर के परिणाम के आधार पर, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है – फ्रंट रनर, अचीवर्स और एस्पिरेंट्स।

अन्य राज्यों का हाल 

वहीं बड़े राज्यों में सबसे निचला स्थान छत्तीसगढ़ का रहा जिसे 26वां स्थान मिला और उसका स्कोर 31.7 रहा।  स्कोर से देखा जा सकता है कि राज्य ने पर्यावरणीय स्थिरता ,स्वच्छ ऊर्जा पहल, ऊर्जा दक्षता, और नई पहल के मामले में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हैं. वहीं सुधार की दृष्टि से सबसे अच्छा प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश ने किया है।