फायदे ही नही ई-हाईवे के हैं बहुत सारे नुकसान! पढ़िए ई हाईवे से जुड़ी सारी बातें

भारत में प्रदुषण को कम करने और ट्रांसपोर्ट के रास्ते को सरल और सस्ता बनाने को लेकर कई हाईवे बनाए जा रहे हैं. इसी कड़ी में केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक ई हाईवे बनाने का एलान कर दिया है. इस ई हाईवे का निर्माण दिल्ली से जयपुर के बीच में किया जाना है.

हम इस  वीडियो ई-हाईवे के बारे में बात करने जा रहे हैं.क्या होता है ई हाईवे?
सबसे पहला सवाल है कि ई हाईवे होता क्या है?  एक ऐसा हाईवे जिसपर इलेक्ट्रिक वाहन चलते हों। आसान भाषा में समझें तो आपने ट्रेन के ऊपर एक इलेक्ट्रिक वायर देखा होगा जिसके जरिये पूरी ट्रेन को इलेक्ट्रिसिटी मिलती है। इसी तरह हाइवे पर भी इलेक्ट्रिक वायर लगाए जाएंगे जिसके जरिये हाइवे पर चलने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिसिटी मिलेगी.. हालाँकि इलेक्ट्रिक वायर के जरिये बड़े वाहनों को इलेक्ट्रिक सप्लाई की जाती है और छोटे वाहनों के लिए यानी कि जो चार्जिंग से चलते हैं उनके लिए  थोड़ी-थोड़ी दूरी पर चार्जिंग पॉइंट भी होते हैं. इसे ही ई-हाइवे, यानी इलेक्ट्रिक हाइवे कहा जाता है।

दरअसल दिल्ली मुंबई के बीच जो एक्सप्रेसवे बन रहा है उसी एक्सप्रेसवे के  एक लेन को इलेक्ट्रिक हाईवे से जोड़ने का प्लान बनाया गया है.  ये लेन पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी और इसमें केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही चलेंगे।

अब सवाल ये है कि इस ई-हाईवे के फायदे क्या होंगे!

सबसे बड़ी बात कि ई-हाईवे से ट्रांसपोर्ट का खर्चा कम हो जायेगा!
गाडियों से होने वाले प्रदुषण में कमी आएगी
पेट्रोल- डीजल पर निर्भरता कम होगी, पेट्रोल डीजल बाहर से आते हैं तो इनके दाम घटते बढ़ते रहते हैं और इसका असर सीधा महंगाई पर पड़ता है.

वैसे आपको बता दें कि दुनिया भर में कई तरह के ई हाईवे बनाये जा आरहे हैं लेकिन भारत की तरफ से स्वीडन की कम्पनी से बातचीत हो रही है.. इसलिए यही कहा जा रहा है जिस तकनीक पर स्वीडन में ई हाईवे बनाये  गये हैं, उसी तकनीक पर भारत में भी काम हो सकता है.

स्वीडन में पेंटोग्राफ मॉडल इस्तेमाल किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें हाईवे पर इलेक्ट्रिक तार लगे होते हैं . पेंटोग्राफ के जरिए इस इलेक्ट्रिसिटी को वाहन में सप्लाई किया जाता है.ये इलेक्ट्रिसिटी डायरेक्ट इंजन को पॉवर देती है या वाहन में लगी बैटरी को चार्ज करती है.

बिजली सप्लाई करने के लिए और भी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जैसेकि कंडक्शन और इंडक्शन.. कंडक्शन तकनीक में बिजली सड़क में ही लगे तार के जरिये बिजली सप्लाई की जाती है वहीँ इंडक्शन तकनीक में बिजली एल्क्ट्रोमैग्नेटिक करंट के जरिये बिजली सप्लाई की जाती है.

वैसे स्वीडन और जर्मनी में इलेक्ट्रिक वाहन में हायब्रिड इंजनों का प्रयोग किया जाता है जो इलेक्ट्रिक के साथ पेट्रोल या डीजल पर भी चल सकते हैं.  ई हाईवे पर गाड़ियों में डायरेक्ट बिजली की सप्लाई सिर्फ ट्रक और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दी जाती है.. अगर आपका पर्सनल व्हीकल इलेक्ट्रिक है तो भी आप इस हाईवे का इस्तेमाल कर सकते हैं इसके लिए आपको जगह जगह पर चार्जिंग पॉइंट्स दिए जायेंगे!

हालाँकि इस हाईवे को बनाना और चलाना इतना आसान नही है.  सबसे बड़ी बात है ई हाईवे को बनाने में खर्च बहुत ज्यादा आता है और पूरे देश में ई-हाईवे नेटवर्क फैलाना इतना आसान नही होगा. ई हाईवे पर चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना और अभी चल रहीं डीजल-पेट्रोल वाले ट्रक और बसों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों में रिप्लेस करना भी आसान नही है! सबसे बड़ी बात इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लगने वाली बैट्री बनाना एक कठिन और जटिल काम है क्योंकि ऐसी बैट्री में से खतरनाक केमिकल होते हैं और सबसे बड़ी बात कि इन बैटरियों के केमिकल हमारे पर्यावरण के लिए खतरनाक होती है. इस मुद्दे को कई पर्यावरण कार्यकर्ता और संगठन  उठा चुके हैं.