Omicron Variant: अच्छा तो ऐसे लगाया गया ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता?

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने पूरी दुनिया को फिर से दहशत में डाल दिया है. इस वैरिएंट को लेकर वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने भी चिंता जाहिर की है और इसे हाई सिस्क वाला करार दिया है. लेकिन क्या आप ये जानते है कि कोविड के इस वैरिएंट का पता कैसे चला..अगर नहीं तो चलिए जानते है और साथ ही ये भी जानेंगे की जब इस वैरिएंट का पहली बार पता लगा तो वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया क्या थी..

After UK, these countries report cases of omicron variant of coronavirus |  World News - Hindustan Times

बता दें कि सबसे पहले इस वैरिएंट की पहचान दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने की थी. अब जाकर रॉयर्स की एक रिपोर्ट आई है जिसमें वैज्ञानिकों ने रॉयटर्स को बताया है कि पहली बार जब उन्होंने ओमिक्रॉन की पहचान की थी तो उनकी प्रतिक्रिया क्या और कैसी थी. रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि 19 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े प्राइवेट टेस्टिंग लैब की हेड ऑफ साइंस रकिल वियाना कोरोना वायरस के 8 सैंपल्स पर जीन की सिक्वेंसिंग कर रही थी. इस दौरान उन्होंने देखा कि टेस्ट किए गए कई सैंपल में बहुत म्युटेशन थे. ख़ास कर स्पाइक प्रोटीन पर जो वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए इस्तेमाल करता है. अचानक ये सब देखने के बाद उन्हें बड़ा झटका लगा.

प्रो. वियाना ने रॉयटर्स को बताया कि मैं जो देख रही थी, उससे काफी हैरान थी. मैंने खुद से ही सवाल किया कि क्या इस पूरे प्रोसेस में मैंने तो कुछ गलती नहीं कर दी? मैं ये  सोच कर ही सहम गई थी कि कही इस सैंपल्स का कोई बड़ा प्रभाव ना पड़ जाए. मैंने जल्द ही जोहान्सबर्ग में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (NICD) में अपने सहयोगी जीन सीक्वेंसर, डैनियल अमोआको को कॉल किया और मैंने उनको बताया की यह कोरोना के एक नए वंश की तरह दिखता है.

जिसके बाद एमोआको और उनकी टीम ने 20-21 नवंबर को वियाना के भेजे गए आठ सैंपल्स का परीक्षण किया. इन सबमें एक ही तरह का म्यूटेशन देखा गया. यह इतना अजीब था कि एमोआको ने भी यही सोचा कि टेस्टिंग के दौरान उनसे कोई गलती हो गई है. इसके बाद एमोआको की टीम ने याद किया कि उसी सप्ताह उन्होंने COVID-19 मामलों में अचानक तेजी देखी थी. हो सकता है ये वायरस के एक नए म्यूटेशन के कारण हो रहा हो.

जिसके बाद एमोआको और उनकी टीम ने दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग और सिक्वेन्सिंग करने वाले कई अन्य लैब्स को इसकी जानकारी दे दी. जल्द ही दोनों जगहों से भी ऐसे ही सैंपल्स आने लगे. करीब 32 और टेस्ट करने के बाद ये साफ था कि ये वैरिएंट अलग था.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि कोरोना का नया वैरिएंट कितना खतरनाक है और इसके लक्षण कितने गंभीर हो सकते हैं. यह अलग-अलग उम्र के लोगों पर कैसे असर करेगा, इन सारे सवालों के जवाब अभी तक साफ नहीं हो सके है. इनपर काम कर रहे साइंटिस्ट्स की माने तो दिसंबर आख़िरी तक इनका सही जवाब मिल पाएगा.

फिलहाल कोरोना के इस नए वैरिएंट के बढ़ते रफ्तार ने तमाम देशों की चिंता बढ़ा दी है. जिसको लेकर सरकार लगातार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रही है. इतना ही नहीं ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर कई देशों ने पाबंदियां भी लगानी शुरू कर दी हैं.