दुनिया के एक चौथाई लोग सदी की सबसे भयानक बाढ़ के खतरे में

बाढ़ अब तक की चरम मौसम की घटनाओं में सबसे आम है, जिसकी बढ़ोतरी के लिए जलवायु परिवर्तन काफी हद तक जिम्मेवार है। जलवायु परिवर्तन के साथ यह खतरा बढ़ता जा रहा है और ऐसे लोगों की संख्या भी बढ़ रही है जो इस खतरे के दायरे में आ चुके हैं। वर्षा पैटर्न में भी बार-बार बदलाव आ रहे हैं, जिससे बाढ़ आने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।  एक अध्ययन के मुताबिक दुनिया का लगभग हर चौथा इंसान बाढ़ के खतरे में है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है की लगभग एक चौथाई दुनिया पर बाढ़ का गंभीर खतरा है और गरीब देशों में यह खतरा ज्यादा बड़ा है।

बाढ़ से किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ता है। भरी बारिश और बाढ़ के कारण दुनिया में हर साल अरबो रुपये का नुक्सान होता है। पिछले साल भारत, चीन, जर्मनी और बेल्जियम जैसे देशों में घातक बाढ़ से अरबों का नुकसान हुआ है, जो अक्सर समाज के गरीब इलाकों को असमान रूप से प्रभावित करता है। हालाँकि भारत में बाढ़ आने का दौर जारी है। यहां मानसून किसी राज्य में जरूरत से ज्यादा बरस रहा है, तो वहीं कुछ राज्यों में बारिश में काफी कमी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक साल २००० से २०१९ तक बाढ़ की वजह से हुए नुक्सान का अध्ययन किया गया है। एक एस्टीमेट के मुताबिक 2000 से 2019 तक दुनिया भर में बाढ़ की वजह से लगभग 65,100 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। 

वैश्विक खतरे का अध्ययन किया

शोधकर्ताओं ने विश्व में बाढ़ से होने वाले खतरे का अध्ययन किया है और इस खतरे में समुद्र, नदियां और बारिश आदि बाढ़ के सभी संभावित खतरों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 1.81 अरब लोग खतरे में हैं। इनमे से 90 प्रतिशत न्यून या मध्य आय वाले देशों रहते हैं. शोध का निष्कर्ष है कि गरीबी की रेखा से नीचे जीने वाले लोगों के लिए भयानक बाढ़ के खतरे का जो आकलन पहले किया गया था, “जोखिम उससे कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक 1.81 अरब लोग यानी ग्रह की लगभग 23 फीसदी आबादी ऐसी खतरनाक बाढ़ के सीधे खतरे में हैं जो कि सौ साल में एक बार आती है. इस बाढ़ में छह इंच से ज्यादा पानी का भराव हो सकता है. शोध कहता है, “ऐसी बाढ़ जिदंगियों और रोजी-रोटी को गंभीर खतरा पहुंचाएगी, खासकर कमजोर तबकों के लिए.”

जलवायु परिवर्तन की वजह से लोग दूसरे जगहों पर जाने के लिए मजबूर हो रहे है। इतने बड़े परिवर्तन और पलायन के कारण 2030 तक 25 अतिरिक्त देश बाढ़ के सबसे अधिक खतरे का सामना करेंगे। पिछले अनुमानों की तुलना में बाढ़ के खतरे में अब आने वाले अतिरिक्त लोगों की संख्या 10 गुना अधिक होगी। बाढ़ की आशंका वाले अधिकांश देश दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में हैं, लेकिन उपग्रह के आंकड़ो ने लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व में भी बाढ़ के खतरों में वृद्धि दिखाई है, जहां पहले ऐसा नहीं होता था।

जयादातर लोग है गरीबी रेखा से नीचे

शोधकर्ताओ के मुताबिक जयादातर बाढ़ का सामना गरीब तबके को करना पद रहा है। गरीब देशों को खतरा ज्यादा है क्योंकि वहां खतरों के असर ज्यादा समय तक रहेंगे। खतरे के दायरे में आने वाले लोगों में से 1.21 अरब लोग दक्षिण और पूर्व एशिया में रहते हैं. इनमें चीन और भारत का नाम विशेष है जहां दुनिया की एक तिहाई आबादी रहती है. इन लोगों में से 78 करोड़ ऐसे हैं जो रोजाना 450 रुपये से भी कम की आय पर गुजर करते हैं.

दिखने लगे हैं असर

जलवायु परिवर्तन ने अत्याधिक बारिश होने की घटनाओं की बारंबारता बढ़ा दी है और यह बारिश दुनियाभर में ज्यादा गंभीर हो गई है. इससे इन इलाकों में बाढ़ और ज्यादा भयानक हो सकती है। इस का ताजा उदहारण चीन, भारत और बांग्लादेश में आयी बाढ़ है। इन देशो के के हिस्सों में आई बाढ़ ने करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया. चीन में लगभग 50 लाख लोग विस्थापित हो गए जबकि बांग्लादेश में लाखों लोग राहत कैंपों में रह रहे हैं. सभी जगह बाढ़ ऐसी बारिश की वजह से आई, जो सदीभर में सबसे ज्यादा थी।

जलवायु विज्ञान की एक रिपोर्ट, में पूर्वानुमान लगाया गया है कि बाढ़ भविष्य में अफ्रीका में सालाना 27 लाख लोगों को विस्थापित करेगी और 2050 तक 8.5 करोड़ लोग अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। अधिकांश बाढ़ की घटनाएं अधिक बारिश होने के कारण हुईं हैं, इसके बाद तूफान, बर्फ या बर्फ के पिघलने और बांध के टूटने जैसी घटनाओं से हुई हैं।