रेगिस्तान बन जायेगा पलामू, जानिए क्यों तेजी से हो रहा जलवायु परिवर्तन

अभी तक जलवायु परिवर्तन सिर्फ किताबी बाते या फिर वैज्ञानिको की मानाने या कहने वाली बाते मानी जा रही थी। लेकिन वर्तमान समय में

जलवायु परिवर्तन का असर अब आम जनजीवन पर दिखने लगा है। आम जनजीवन को अब बाढ़, सूखा, तेजी से मौसम में बदलाव, चक्रवात जैसी प्राकर्तिक समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है। हाल में ही जलवायु परिवर्तन को लेकर झारखण्ड के पलामू की जो तस्वीर सामने निकल कर आयी है वो काफी भयानक है। देश के जाने-माने पर्यावरणविद, वन्य प्राणी विशेषज्ञ सह नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी के संस्थापक डॉ दयाशंकर श्रीवास्तव का कहना है की पलामू, गढ़वा, लातेहार अर्थात पूरा पलामू प्रमंडल रेगिस्तान बनने की ओर अग्रसर है और यह सब जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है।

बड़े पैमाने पर हो रहा जलवायु परिवर्तन

झारखण्ड के पलमू में जलवायु परिवर्तन बड़ी तेजी से हो रहा है। जिस तेजी से पलामू में जंगल कट रहे हैं, एक-एक कर पहाड़ वनविहीन होकर पत्थर माफियाओं की भेंट चढ़ रहे हैं, अगर ऐसा ही चलता रहा तो आनेवाले 10 वर्षों में पलामू का अधिकतर इलाका रेगिस्ताननुमा हो जायेगा इस साल पलामू में दिन और रात की गर्मी का आकलन करें, तो पता चलता है कि उसमें बहुत फर्क आ गया है।

 पलमू में दिन और रात के तापमान में काफी अंतर आ रहा है जो की अच्छे संकेत नहीं है। दिन में जहा गर्मी 40-45 डिग्री सेल्सियस है , तो रात में वही 18-20 डिग्री सेल्सियस रह रही है। दिन और रात के तापमान में करीब २० डिग्री सेल्सियस या उस से अधिक अंतर आ रहा है और यह कोई अच्छा संकेत नहीं है। इतना अंतर तो रेगिस्तान के तापमान में होता है। जहा पलमू में पहले दिन और रात के तापमान में अंतर १० या फिर १२ डिग्री सेल्सियस का होता था, वही अब इतना बड़ा अंतर यह संकेत दे रहा है की पलमू रेगिस्तान बनने की और अग्रसर है।

रोकी जा सकती है तबाही

अगर इसी तरह से चलता रहा तो जलवायु परिवर्तन को लेकर जो परिणाम सामने आएंगे वो काफी भयानक होगे। सबसे पहले इस तूफान का असर पड़वा से लेकर विश्रामपुर के इलाके में दिखेगा। अगर हम इस तबाही को रोकना कहते है तो अभी भी हमारे पास समय है। यदि हम  पहाड़ों को पत्थर माफिया से बचाकर उसे हरा-भरा छोड़ दिया जाये, तो तीन से पांच साल के भीतर जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लग जायेगा।  हलाकि यह सब करने के लिए लोगो को भी जागरूक होना होगा। लोगो को प्रशासन के साथ मिल कर के काम करना होगा और वनो की कटाई पर रोक लगनी होगी और साथ ही साथ नए पेड़ भी लगाने होंगे।