गर्भवती महिला को लेकर 5 किमी तक पैदल चला भाई, मुख्यमंत्री कार्यालय से महज 100 किमी दूर की घटना

वैसे तो मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मानी जाती है. करोड़ो का व्यापार होता है, हजारों करोड़पति मुंबई व आसपास के इलाकों में रहते हैं. करोड़पति लोगों को करोड़पति बनने में अहम् भूमिका निभाते हैं आस पास रहने वाले लोग/ मजदूर/ कर्मचारी, लेकिन आर्थिक राजधानी से महज कुछ किमी दूर पर आज भी हालात ऐसे हैं कि गर्भवती महिला को अस्पताल पहुचाने के लिए कई किमी पैदल चलना पड़ता है क्योंकि सड़क नही है, लकड़ी और कपड़े से सवारी बनाई जाती है  क्योंकि गाँव तक गाड़ी नही पहुँच सकती.

ऊपर दी गयी तस्वीर को आप जरा ध्यान से देखिये. तस्वीर में कुछ लोग लकड़ी और चद्दर में लपेट कर कन्धों पर उठाये कुछ लिए जा रहे हैं. हैरान मत होइएगा इसमें एक गर्भवती महिला लेती हुई हैं जो सात महीने से गर्भवती है. घटना मुंबई महानगर/ आर्थिक राजधानी मुबई से सटे पालघर की है. पालघर जिले के अंबरभुई गांव में रहने वाली 21 साल की आरती विशाल तबाले 7 महीने से गर्भवती हैं. बुद्धवार को अचानक उसके पेट में दर्द हुआ तो उसने अपने भाई को फ़ोन किया. भाई पालघर से सटे वसई में कुछ काम कर रहा था. फोन आने पर वो काम छोड़कर गाँव पहुंचा और फिर गाँव वालों की मदद से लकड़ी और कपड़े के सहारे एक डोली नुमा सवारी तैयार की और आरती को उसमें लिटाकर हॉस्पिटल के लिए निकले.

घना जंगल, पहाड़ी रास्ता, बारिश की वजह फिसलन और कंधे पर बहन को लिए आरती का भाई और उसके सहयोगी अस्पताल के लिए निकल पड़े. करीब पांच किमी पैदल चलने के बाद आख़िरकार उन्हें एक सवारी गाड़ी मिली. जिमें वे महिला को लिटाकर अस्पताल ले गये. हालाँकि अस्पताल में जाने पर डॉक्टर ने बताया कि आरती ठीक है. अभी बच्चे के जन्म का वक्त नही आया है.  अस्पताल में चेकअप के बाद आरती के भाई और  उसके सहयोगी फिर महिला को लेकर कुछ दूर तक गाड़ी से आये और फिर उन्हें उसी कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ा जो सरकार की नाकामियों को गिना रहा है.

गर्भवती महिला, बिना सड़क, बारिश के बीच अब आरती के परिवार को चिंता सता रही है कि इस बार वे जैसे तैसे कर 3 घंटे में अस्पताल तो पहुँच गये लेकिन अगर उन्हें अस्पताल पहुँचने पर देर हो जाये, या जरूरत पड़ने पर वे जल्दी अस्पताल ना पहुँच पाए तो कोई अनहोनी ना हो जाए!
आरती के परिजनों की ये चिंता वाकई राष्ट्रीय शर्म की बात है. जिस मुंबई को आर्थिक राजधानी कही जाती है , जिस पालघर जिसले से महज 100 किमी की दूरी पर विधानसभा हो, मुख्यमंत्री कार्यालय हो ऐसी जगह पर अगर गर्भवती महिलाओं के लिए उचित जगह ना हो, महिलाओं को अस्पताल पहुंचने के लिए कोई सुविधा न हो.. इसे राष्ट्रीय शर्म या राजकीय शर्म ना कहा जाए तो क्या कहा जाये?

आपको इस खबर पर क्या राय है हमें कमेन्ट करके जरूर बताएं