सड़क बनाने के लिए अब प्लास्टिक का होगा उपयोग, पर्यावरण बचाने के लिए बड़ी मुहिम

प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की चर्चा आए दिन होती रहती है..इसी के मद्देनज़र देश के कई हिस्सों में प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जा रहा है..प्लास्टिक हमारे वातावरण के लिए काफी दुखदायी है..इसी को देखते हुए वातावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम भी उठाया जा चुका है..काफी दिनों पहले देश के पीएम ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगाया था..जिसको लेकर छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में प्लास्टिक के कचरे को इस्तेमाल करने के लिए एक केंद्र विकसित किया जा रहा है..इस केंद्र में उपयोग में लायी गई प्लास्टिक को रीसाइकिल किया जाएगा..इसी प्लास्टिक से सड़कें बनाने की भी तैयारी की जा रही हैं..

भिलाई स्टील प्लांट राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन यानी की srlm के तहत रीसाइकिल सेंटर बना रहा है..यहां एक ऐसी मशीन लगाई जाएगी जो प्लास्टिक को सड़क बनाने के लिए प्लास्टिक के कचरे को छोटे-छोटे दानों में बदल देगी..ऐसा दावा किया जा रहा है यह सड़कें टिकाऊ भी होंगी..हर रोज भिलाई शहर में ही 30 टन के करीब प्लास्टिक वेस्ट निकलता है..इस कचरे को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जाएगा..प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग के लिए लगाई जाने वाली मशीन को हर रोज कई टन प्लास्टिक चाहिए होगी..बस छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बिहार में भी खराब प्लास्टिक से सड़क बनाने की तैयारी है..पटना नगर निगम और यूएनडीपी की सहयोग से जल्द ही प्लास्टिक की सड़कें बनाई जाएगी तो वहीं पूर्व मध्य रेलवे ने प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत फेंके गए बोतलों से टीशर्ट और टोपी बनाने का भी काम चल रहा है..इस प्रोजेक्ट के तहत कुछ टी-शर्ट बनकर तैयार हुई हैं। उसे दानापुर रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनी के तौर पर रखा गया है। रेलवे आने वाले दिनों में इसे बाजार में बेचेगी। 

केक प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नामक कंपनी ने तो अभी तक लगभग 10 हज़ार किलोमीटर प्लास्टिक युक्त सड़कें बनवाई है..जिन शहरों में प्लास्टिक युक्त सड़कें हैं, उनमें कोलकाता, पुणे, जमशेदपुर के अलावा हिमाचल जैसे कई अन्य शहर शामील है..

सड़क तैयार करने की प्रक्रिया

सबसे पहले पॉलीथिन के कैरी बैग, प्लास्टिक के कप-ग्लास, नमकीन-भुजिया के पैकेट या रैपर, चॉकलेट-लेमन चूस के रैपर और शैंपू-सॉस आदि के सैशे को बीन कर उसकी सफाई की जाती है। फिर उसे मशीन से एक निश्चित आकार में काट लिया जाता है।

प्लास्टिक से बनी सड़कों का ये होगा फ़ायदा

1.कचरे में फेंके गए प्लास्टिक से बनीं सड़कें होंगी सुरक्षित
2.कचरे में फेंके गए प्लास्टिक को प्रोसेस कर बनी सडकें सस्ती होगी
3.ये सड़कें मानसून के दौरान ज्यादा टिकाऊ भी होती हैं
4.इसके अलावा यह 50 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी नहीं पिघलती हैं। 
5.इससे शहर, गांव, कस्बों में उड़ते पॉलीथिन और प्लास्टिक के कचरे से निजात मिलेगी
6.इससे प्लास्टिक कचरा बीनने वालों को आमदनी का एक जरिया मिलेगा
7.आसपास के गांव-शहर स्वच्छ और सुंदर होंगे
8.इससे वहाँ की मिट्टी की उर्वरकता बनी रहेगी
9.इससे बनी सड़क को लगभग पाँच साल तक मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी

रोड में प्लास्टिक के कचरे का उपयोग करना अनिवार्य

अब छत्तीसगढ़ में विभिन्न एजेंसियों पीडब्लूडी, पीएचई, स्मार्ट सिटी, जल संसाधन और ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की सड़कों में अनिवार्य रूप से प्लास्टिक कचरे का उपयोग करना होगा..शहरी निकायों के लिए भी प्लास्टिक का सड़क या बिजली बनाने में उपयोग अनिवार्य होगा..पहले भी बिलासपुर और अंबिकापुर में एक दो सड़कें प्लास्टिक की बनाई गई थी,उसी की तर्ज पर अब हर जिले में काम होगा..खास तौर से पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएस वाय और हाउसिंग बोर्ड की सड़कों में इसे पूरी तरह से लागू करने का निर्देश दिया गया है..लास्टिक कचरे से सड़क बनाए जाने से जहां एक ओर प्रदूषण की रोकथाम होगी, वहीं दूसरी ओर सड़कें लंबे समय तक चलेंगी..साथ ही स्वच्छ भारत योजना को एक नई दिशा भी मिलेगी..