हाथी दिवस : अब जंगल से बाहर नही हाथी, सरकार ने तैयार किया है पूरा पलान

पिछले कुछ दिनों से हाथियों से जुडी कई ख़बरें सामने आई है, जिसमें हमने पढ़ा कि कहीं खाने की तलाश में जंगल से बाहर आये हाथियों ने गाँव पर हमला कर दिया तो कहीं गांववालों ने हाथियों से बचने से के लिए बिस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया है. हालाँकि अब सरकार ने ऐसा प्लान तैयार किया है जिससे जंगली हाथी अब जंगल छोड़कर बाहर नही आयेंगे और उन्हें वहीँ पर पर्याप्त मात्रा में भोजन उल्लाब्ध कराया जाएगा.

दरअसल हाथी दिवस के पूर्व संध्या पर पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रेस कांफ्रेसं कर पूरी जानकारी दी है. दरअसल कई बार हाथी भोजन की तलाश में जंगल से बाहर आ जाते हैं और मनुष्यों और हाथिओं के बीच संघर्ष होता है. दरअसल कई बार हाथी मनुष्यों से सामना करते ही आक्रोशित हो जाते हैं और हमला कर देते हैं . जिससे लोग हाथियों से डरते हैं वहीँ हाथियों से अपनी खेती बचाने के लिए ग्रामीण बिस्फोटक का इस्तेमाल करते हैं जो हाथियों के लिए घातक साबित होता है. इतना ही जंगल से गुजरने वाली ट्रेन से भी हाथियों की मौत हो जाती है. वहीँ जंगल में हाथियों का शिकार भी किया जाता रहा है,

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अनुसार 2010 से लेकर 2017 तक हर साल औसत 33 हाथी शिकारियों का शिकार बन रहे हैं. यह वो आंकड़ा है जो शिकारियों के पकड़े जाने या फिर शिकार किए गए हाथियों के शव या उनके अवशेष से इकट्ठा किया गया है. 2010 में 49, 2011 31, 2012 45, 2013 38, 2014 22, 2015 41, 2016 21 और 2017 में 18 हाथियों के शिकार होने का आंकड़ा सामने आया था.

वहीँ पर्यावरण मंत्री हाथी दिवस पर कहा कि पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि भारत हाथियों और अन्य जानवरों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है. मानव और पशुओं के टकराव को समाप्त करने के लिए एक ठोस, व्यावहारिक और किफायती समाधान लाने की दिशा में भी हम काम कर रहे हैं. विश्व हाथी दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम के दौरान ‘भारत में मानव–हाथी टकराव प्रबंधन के सर्वोत्तम उपाय’ पर एक किताब जारी करते हुए पर्यावरण मंत्री ने कहा कि मानव और हाथी दोनों के बीच टकराव को कम करने और दोनों के मूल्यवान जीवन को बचाने के लिए मानव-हाथी सह-अस्तित्व को मजबूत करना महत्वपूर्ण है

हालाँकि ये खबर अच्छी है कि अब सरकार वन्य जीवों पर विशेष ध्यान दे रही है, अभी हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ऐसा देश जहाँ पर बाघ सबसे ज्यादा पाए जाते हैं मतलब सरकार उनके संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है. हाथियों के लिए भी उठाया जा रहा कदम कई मायनों में बड़ा ही खास है.