राष्ट्रपति ने सेल्फ इम्यूनिटी बूस्टर नामक पुस्तक को आयुष मंत्रालय के लिए किया रिकमेंड

नई दिल्ली/रांची: भारत के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद ने सेल्फ इम्यूनिटी बूस्टर नामक पुस्तक को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के लिए रिकमेंड किया है। यह झारखंड के लिए गर्व की बात है कि इस पुस्तक के लेखक प्रोफेसर मनोज कुमार रांची से हैं और मेडिकल के स्टूडेंट्स सहित छात्र छात्राओं को बायोलॉजी की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इतना ही नहीं प्रोफेसर मनोज कुमार पिछले 24 वर्षों से वायरस और इम्यूनिटी बूस्ट करने पर काम कर रहे हैैं। उन्होंने 10 वर्षों तक एचआईवी ऐड्स पर रिसर्च किया है तथा नेशनल ऐड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (NACO) के लिए स्टेट मास्टर ट्रेनर के रूप में 5 वर्षों तक का कार्य अनुभव भी रखते हैं।

ज्ञातव्य है कि पूरा विश्व आज विश्वव्यापी महामारी कोरोना कोविड-19 से प्रभावित है। समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में इस पुस्तक का राष्ट्रपति के द्वारा सराह जाना यह साबित करता है कि इस पुस्तक में कुछ तो खास है। आज लाखों की संख्या में लोग कोविड-19 से प्रभावित होकर काल के गाल में समा चुके हैं। स्थिति आज भी भयावह नजर आती है, ऐसे में यदि यह पुस्तक कोरोना जैसे वायरस से लड़ने के लिए लोगों में जागरूकता लाती है और प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करने की दिशा में लोगों को प्रेरित करती है तो यह निश्चित है कि आने वाले समय में हम न सिर्फ कोरोना बल्कि अन्य सभी वायरस से लड़ने की क्षमता विकसित करने में कामयाब रहेंगे।

सेल्फ इम्यूनिटी बूस्टर नामक पुस्तक के संदर्भ में पूछे जाने पर इस पुस्तक के लेखक प्रोफेसर मनोज कुमार ने बताया कि बायोलॉजी के विशेषज्ञ के नाते उन्हें यह ज्ञात था कि कोरोनावायरस जैसे वायरस कभी भी हमें प्रभावित कर सकते हैं, जिस कारण वह लंबे समय से इस विषय पर काम कर रहे थे। यह संयोग ही है कि 2019-2020 में कोविड-19 से पूरा विश्व प्रभावित हो गया। लॉकडाउन ने भी उन्हें इस पुस्तक को अंतिम रूप देने में प्रेरित किया और उसी का परिणाम है कि वह इस पुस्तक को मूर्त रूप दे पाए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी के द्वारा उनकी पुस्तक को आयुष मंत्रालय के लिए भी रिकमेंड किया जाना उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर गर्व की बात तो है ही साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई है कि उनकी पुस्तक आम लोगों के लिए सहायक साबित होगी। उन्होंने कहा कि लोगों को इम्यूनिटी बूस्ट करने के दिशा में जागरूक करने की आवश्यकता है तथा वे किसी भी मंच पर इस विषय पर अपना व्याख्यान रखने को तैयार हैं।