पुलवामा हमला : जब देश कह रहा था “बदला लो हुक्मरानों, वरना माफ़ नही करेंगे”

“तुम्हारे शौर्य के गीत, कर्कश शोर में खोये नहीं।
गर्व इतना था कि हम देर तक रोये नहीं।”

देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी चल रही थी, प्रचार प्रसार लगभग शुरू ही हो  चुके थे.. लोग बसंत के मौसम के मजे ले रहे थे.. कुछ प्यार वाला हफ्ता भी मना रहे थे.. मतलब सबकुछ बड़े ही मजेदार तरीके से बीत रहा था तभी एक खबर आती है और जैसे पूरे देश में सन्नाटा पसर जाता है.. सबकी निगाहें टीवी पर टिक जाती है.. हमारे देश के शौर्य, पराक्रम, गर्व और हमारी रक्षा करने वाले जवानों के साथ कुछ ऐसा होता है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया.. सन्न कर दिया..

दरअसल 13 फ़रवरी को दोपहर साढ़े तीन बजे जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के लीथोपोरा सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर  आत्मघाती हमला होता है.. सीआरपीएफ के काफिले से विस्फोटक से भरी एक गाड़ी टकराती है, उसके बाद एक भीषण धमाका..धमाका इतना ताकतवर था कि हमारे देश वीर जवानों के शरीर के परखच्चे उड़ गये, शरीर ना जाने कितने टुकड़ों में बाँट गयी/. जिसे हम स्वर्ग की धरती कहते हैं वो देश के जवानों के खून से लाल हो चुकी थी. देशभर में ये खबर मिनटों में फ़ैल गयी कि हमारे देश के जवानों के काफिले पर हमला हुआ है इसके कुछ ही समय बाद वहां की तस्वीरें सामने आने लगी.. इसके बाद जैसे पूरा देश रुआंसा हो उठा था, इस हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो चुके थे. ये हमला तीन दशकों में हुआ सबसे बड़ा हमला था। जहां इस हमले से पूरा देश दहला हुआ था तो वहीं देश के हुकमरान चुप थे. हालाँकि उनके मन में क्या चल रहा था इस बात को तो हम नही जाते लेकिन लोगों के अंदर बस एक ही आग जल रही थी कि बदला, लोगों की एक ही  मांग थी बदला… लोगों ने साफ़ कह दिया है कि अगर देश के हुक्मरानों ने इसका बदला नही लिया तो देश उन्हें कभी माफ़ नही करने वाला! ये गुस्सा भी लाजमी था.. गुस्सा आना ही था… आख़िरकार देश के जवान सीमा पर लड़ाई करते हुए शहीद नही हुए.. दुश्मनों का मुकाबला करते हुए शहीद नही हुए बल्कि उनपर तब हमला किया गया जब वो निहत्थे थे.. वो सब मस्ती मजाक करते हुए सफ़र कर रहे थे. ऐसे में उन पर हमला होने पर गुस्सा आना लाजमी था.

सरकार और पडोसी देश पाकिस्तान के प्रति लोगों में नाराजगी थी. सरकार से बदला लेने कि मांग हो रही थी, सबक सिखाने की बात हो रही थी, इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भी कह दिया कि हम जवानों की शहादत को ऐसे ही बेकार नही जाने देंगे … ठीक इस हमले के 12 दिन बाद जो हुआ उसकी उम्मीद पूरी दुनिया को भी थी. हमले के महज 12 दिन बाद लिया गया बदला। 26 फरवरी की सुबह जब आसमान को रात के अंधेरे ने छोड़ा भी नहीं था, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित आतंकियों के ठिकानों पर हमला कर दिया। भारत ने बदला ले लिया लेकिन इस बात का पूरा ध्यान दिया गया था कि इस हमले में किसी मासूम की जान ना जाने पाए.. हमला होने के बाद भारत में ख़ुशी थी, जवानों के गुणगान गाये जा रहे थे.. सरकार की सराहाना की जा रही थी. लेकिन इन सबके बीच राजनीति भी हो रही थी. कोई सबूत मांग रहा था तो कोई कह रहा था कि हमले में 300 आतंकी मारे गये..

एक साल पूरा हो गया जब हमारे जवान शहीद हुए थे. पूरा देश आज उन्हें नमन कर रहा है. प्रधानमंत्री, गृह मंत्री समेत लगभग सभी मंत्रियों और देश के राजनेताओं ने जवानों को श्रधांजली दी है. वहीँ सीआरपीएफ ने जवानों को श्रधांजली देते हुए कहा कि “तुम्हारे शौर्य के गीत, कर्कश शोर में खोये नहीं। गर्व इतना था कि हम देर तक रोये नहीं।”पर्यावरण पोस्ट की तरफ से हम उन्हें नमन करते हैं.