अपनी ही पॉटी खा जाते है खरगोश, जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह?

खरगोश दिखने में बहुत प्यारा और खूबसूरत तो होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरगोश खुद की ही पॉटी क्यों खाता है. वैसे अगर देखा जाये तो इसके अपने वैज्ञानिक कारण हैं लेकिन ये बात बेहद अजीब है कि कोई जानवर खुद की पॉटी खा जाये. तो चलिए इस वीडियो में आपको यही बताते है कि खरगोश ऐसा करते क्यों है.
अपनी ही पॉटी को खाना खरगोश के बेहतर हेल्थ के लिए एक जरूरी प्रौसेस है.

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दरअसल खरगोश एक ऐसा जीव है जिसका पाचन तंत्र बहुत अधिक विकसित नहीं होता. खरगोश अधिकतर घास खाकर ही अपना जीवन बिताते हैं. इसीलिए उनके शरीर से बहुत से जरूरी न्यूट्रिएंट्स बिना पचे ही बाहर निकल जाते हैं इसीलिए खरगोश उसे खाकर फिर से अधिक से अधिक पोषक तत्व पचाते हैं.

यहां बता दें कि खरगोश की पॉटी दो तरीके की होती है. एक लिक्विड के रूप में और दूसरी टैबलेट जैसी यानी सॉलिड रूप में.इनके लिक्विड पॉटी को सीकोट्रोप कहा जाता है. ये पोषक तत्वों से भरपूर होते है जो द्रव्य रूप से बॉडी से बाहर निकल जाती है. इसी को ख़रगोश वापस खा लेते हैं और फिर इसे पूरी तरह से पचा कर टैबलेट के रूप में इसे शरीर से बाहर निकाल देते हैं.

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हालांकि जानवरों में सिर्फ खरगोश ही एक मात्र ऐसा जानवर नहीं है जो अपनी पॉटी खुद खा लेता है बल्कि गिनी पिग, छोटे चूहों और ऐसे ही मिलते-जुलते शाकाहारी जानवरों में ये प्रवृत्ति होती है.

जानवरों की दुनिया में ऐसे भी कई जानवर है जो दूसरों की पॉटी खाते है. छोटे बैक्टीरिया से लेकर सुअर, कुत्ते जैसे बड़े जीव भी दूसरों की पॉटी खाकर वातावरण साफ रखने में मदद करते हैं. इसे पर्यावरण के लिहाजें से बहुत फायदेमंद माना जाता है.