1980 की तुलना में ज्यादा तेजी से खत्म हो रहे हैं रेनफॉरेस्ट

जलवायु परिवर्तन की वजह से पकृति में जो भी बदलाव हो रहे हैं, वे धीरे-धीरे हम सबके सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक शोध किया गया जिसमें पता चला है कि ऑस्ट्रेलिया के वर्षावनों (rainforests) के उष्णकटिबंधीय पेड़ (Tropical trees), 1980 के दशक की तुलना में दोगुनी तेजी से खत्म हो रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हुए इस बदलाव के कारण पिछले 35 सालों में ट्रॉपिकल पेड़ों की मृत्यु दर दोगुनी हो गई है।

क्या आया है रिपोर्ट में

स्मिथसोनियन एनवायर्नमेंटल रिसर्च सेंटर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, और फ्रेंच नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट  के शोधकर्ताओं ने शोध कर के एक रिपोर्ट तैयार करी है, जिसमे इस बात का जिक्र है की रेनफॉरेस्ट तेजी से ख़तम हो रहे है। जलवायु परिवर्तन ने हालिया सालों में ग्रेट बैरियर रीफ के कोरल पर क्या असर डाला है ये सबको पता है. अगर आप रीफ से किनारों की तरफ देखेंगे तो पाएंगे कि ऑस्ट्रेलिया के जानेमाने रेनफॉरेस्ट भी तेजी से बदल रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है की वार्मिंग से वातावरण में सुखाने की शक्ति बढ़ी है. पेड़ों की मृत्यु दर में भी इसी वजह से वृद्धि हुई है. अगर ऐसा है, तो ट्रॉपिकल फॉरेस्ट जल्द ही कार्बन स्रोत बन सकते हैं. इससे ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे लाने की चुनौती न सिर्फ जरूरी हो जाएगी, बल्कि उतनी ही मुश्किल भी होगी। इन जंगलों में पेड़ों की औसत मृत्यु दर, पिछले चार दशकों में दोगुनी हो गई है. शोधकर्ताओं का मानना है कि पेड़ अपनी उम्र से आधी उम्र तक ही जीवित रह पा रहे है।

हाल ही में अमेज़ोनिया में किए गए अध्ययनों से भी पता चला है कि ट्रॉपिकल फॉरेस्ट पेड़ की मृत्यु दर बढ़ रहे हैं, जिसकी वजह से कार्बन सिंक कमजोर हो रहा है. लेकिन इसके कारण स्पष्ट नहीं हैं. ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट कार्बन के प्रमुख भंडार हैं और अब तक कार्बन सिंक रहे हैं, मानव द्वारा बनाए गए कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लगभग 12% हिस्से को अवशोषित करते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि वातावरण की बढ़ती सुखाने की शक्ति की वजह से ऐसा हो रहा है. जैसे-जैसे वातावरण गर्म होता है, यह पौधों से नमी खींच लेता है. जिससे पेड़ों में पानी का दबाव बढ़ जाता है और आखिरकार पेड़ के सूखने का खतरा बढ़ जाता है