राजमाता का जीवन जन सेवा को समर्पित था : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्वालियर घराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 102वीं जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन पूरी तरह से जन सेवा को समर्पित था।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, “राजमाता विजया राजे सिंधिया जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनका जीवन पूरी तरह से जन सेवा को समर्पित था। वह साहसी और दयालु थीं। अगर भाजपा एक ऐसी पार्टी के रूप में उभरी है, जिस पर जनता भरोसा करती है, तो इसका कारण यह है कि हमारे पास राजमाता जी जैसे दिग्गज थे, जिन्होंने लोगों के बीच काम किया और पार्टी को मजबूत किया।”

उल्लेखनीय है कि विजया राजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को मध्य प्रदेश के सागर जिले में राणा परिवार में ठाकुर महेंद्र सिंह एवं चूड़ा देवेश्वरी देवी के घर हुआ था। वह एक प्रमुख भारतीय राजशाही व्यक्तित्व के साथ-साथ एक राजनीतिक व्यक्तित्व भी थीं। ब्रिटिश राज के दिनों में ग्वालियर के अंतिम शासक महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पत्नी के रूप में वह देश के सर्वोच्च शाही शख्सियतों में शुमार थीं। बाद के जीवन में वह काफी प्रभाव वाली राजनीतिज्ञ महिला बन गईं और भारतीय संसद के दोनों सदनों के लिए कई बार चुनी गईं। वह कई दशकों तक जनसंघ की सक्रिय सदस्य और भारतीय जनता पार्टी की सह-संस्थापक भी रहीं।

विजयाराजे सिंधिया ने 1957 में कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। वह गुना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं, लेकिन कांग्रेस में 10 साल बिताने के बाद पार्टी से उनका मोहभंग हो गया। वह 1967 में जनसंघ में शामिल हो गईं। विजयाराजे सिंधिया की बदौलत ही ग्वालियर क्षेत्र में जनसंघ काफी मजबूत हुआ। वर्ष 1971 में पूरे देश में जबरदस्त इंदिरा लहर होने के बावजूद जनसंघ ने ग्वालियर क्षेत्र की तीन सीटों पर जीत हासिल की। विजयाराजे सिंधिया भिंड से, उनके पुत्र माधवराव सिंधिया गुना से और अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से सांसद बने।