रक्षाबंधन 11 अगस्त को, जानें इस दिन क्या करें और क्या नहीं

भाई-बहन के प्रमे का पर्व रक्षा बंधन इस सावन की पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। इस बार रक्षा बंधन की दो तिथियों को लेकर कंफ्यूजन है, जहा कुछ लोग ११ अगस्त को राखी मन रहे है वही कुछ लोग १२ अगस्त की माना रहे है। लोग आपस में कह रहा हैं, राखी का तो बड़ा झमेला दिख रहा इस बार, कब से कब तक बंधेगी राखी। लोगों का ऐसा बोलना भी काफी जायज भी है क्योंकि अबकी बार राखी पर भद्रा का ऐसा साया लगा है जो सभी को दुविधा में डाल रहा है।

११ अगस्त को है राखी का त्यौहार

रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस साल पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 38 से आरंभ होगी और 12 अगस्त को सुबह 07 बजकर 05 मिनट पर समाप्त होगी. 11 अगस्त को पूर्णिमा सुबह 10.37 बजे से लग जाएगी और पूर्णमासी जिस दिन लग रही है,  उसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनेगा. यानी 11 अगस्त की पूर्णिमा में रक्षाबंधन मनाया जाना ही शास्त्रोचित है। इस साल रक्षा बंधन पर बेहद खास योग बन रहा है। ज्योतिषियों का कहना है कि रक्षाबंधन पर 24 साल बाद यह संयोग बना है।

राखी बांधने की सही विधि

रक्षा बंधन के दिन बहन के राखी बंधवाते समय भाई को पूरब दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए. साथ ही राखी बांधने के क्रम में बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए. इसके बाद राखी की थाली में अक्षत, चंदन, रोली, घी का दीया रखें. सबसे पहले भाई के मस्तक पर रोली और अक्षत का टीका लगाएं. इसके बाद उनकी आरती उतारें. फिर भाई की कलाई पर राखी बांधे और मिठाई से उनका मुह मीठा कराएं. ध्यान रहे कि ऱाखी बांधते वक्त भाई के सिर खाली नहीं रहना चाहिए. 

राखी के साथ है अलग अलग पर्व

दरअसल, रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा भी है. इसके साथ-साथ अन्य वाधन भी है, इसे राखी भी कहते हैं और इस दिन वेद माता गायत्री जयंती भी होती है. साथ ही साथ इस इस दिन नारली पूर्णिमा भी है, यजुर्वेद उपाकर्म भी इसी दिन है, हयग्रीव जयंती भी इसी दिन है, संस्कृत जयंती भी इसी दिन है.।

रक्षाबंधन पर 4 शुभ संयोग

इस बार रक्षाबंधन पर एक नहीं, बल्कि चार शुभ योग एकसाथ आ रहे हैं. 10 अगस्त को शाम 7 बजकर 35 मिनट से 11 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा. 11 अगस्त को सुबह 05 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक रवि योग रहेगा. फिर दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से अगले दिन 12 अगस्त को 11 बजकर 33 मिनट तक सौभाग्य योग रहने वाला है. इस दिन घनिष्ठा नक्षत्र के साथ शोभन योग भी होगा.।

क्यों नहीं बांधती है भद्रा काल में राखी

भद्रा सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं. शनि की भांति इसका स्वभाव भी क्रूर है. धर्म शास्त्र के अनुसार वैसे तो भद्रा का शाब्दिक अर्थ कल्याण करने वाली है लेकिन इसके विपरित भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा राशियों के अनुसार तीनों लोको में भ्रमण करती है. मृत्युलोक (पृथ्वीलोक) में इसके होने से शुभ कार्य में विघ्न आते है.

भद्रा का रक्षाबंधन से बहुत गहरा नाता है. पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा काल में लंका नरेश रावण की बहन ने उसे राखी बांधी थी जिसके बाद रावण को इसका अशुभ परिणाम भुगतना पड़़ा था. रावण की लंका का नाश हो गया था.