रांची: रामगढ़ अधिवेशन की याद में कांग्रेस ने मनाया स्मरणोत्सव दिवस

रांची। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ऐतिहासिक रामगढ़ अधिवेशन की याद में पार्टी आज यादों की गोद में स्मरणोत्सव दिवस के रूप में मना रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने आज सबसे पहले पटेल चौक पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। बाद में उन्होंने प्रखंड कार्यालय स्थित देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा और सुभाष चौक स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पार्टी के नेताओं को याद किया। महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गांधी घाट पहुंचे जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन किया। इस मौके पर कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, बन्ना गुप्ता,विधायक ममता देवी,दीपिका पाण्डेय सिंह,प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे,लाल किशोर नाथ शाहदेव,डा राजेश गुप्ता छोटू,जयशंकर पाठक,राकेश किरण महतो समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।समाधि स्थल पर गांधी जी के दो अनमोल भजन रघुपति राघव राजा राम एवं वैष्णव जन गाया एवं समाधि स्थल का फेरा लगाया।

इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा रामेश्वर उराँव ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई कांग्रेस पार्टी की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की स्थापना से लेकर आजादी के संघर्ष और आजादी के बाद देश निर्माण में कांग्रेस की भूमिका इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन महान देश विरोधियों के संघर्ष और बलिदान से देश को आजादी मिली उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता, पार्टी आज भी उनके दिखाए रास्ते पर चलने के लिए कृत संकल्पित है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने बताया कि वर्ष 1940 में 18 से 20 मार्च तक आयोजित तीन दिवसीय कांग्रेस महाधिवेशन में ही भारत छोड़ो आंदोलन की बुनियाद रखी गई थी।

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि देश को आजादी मिलने के बाद जब राष्ट्रपिता बापू की हत्या कर दी गई तो उनकी इच्छा के अनुरूप बापू कीअस्थियों को रामगढ़ लाया गया था और दामोदर नदी के तट पर अस्थियां विसर्जित की गई थी आज भी रामगढ़ का गांधी घाट उनकी याद दिलाता है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि दामोदर नदी के किनारे जंगलों के झुरमुट में इस अधिवेशन के लिए सैकड़ों पंडाल लगाए गए थे और जिस उत्साह के साथ पार्टी के स्वयंसेवकों में इस महाधिवेशन को सफल बनाने में सहयोग दिया था, उसे हमेशा याद रखा जाएगा।