स्वामी विवेकानंद सरोवर : रांची के ‘बड़ा तालाब; की हालत खराब, सो रहे हैं सरकारी बाबू?

डेढ़ सौ साल पुराना तालाब…स्वामी विवेकानंद सरोवर नाम से जाना जाने लगा … स्वामी जी की प्रतिमा लगा दी गयी.. मुख्यमंत्री जी ने अनावरण भी कर दिया.. तब इसे बेहद साफ़ सुथरा बनाया गया था लेकिन धीरे धीरे ये तालाब ऐसी स्थिति में बदल गया कि पानी जगह कीचड़, तालाब के किनारे दुर्गन्ध और बत्तखों, मछलियों की जगह जलकुम्भी ने ले ली..

आज हालत ये हैं कि रांची के इस तालाब में जलकुम्भी के अलावा आपको सिर्फ स्वामी विवेका ननंद की सबसे ऊँची प्रतिमा ही दिखाई देगी..

एक तरफ जहाँ सरकारें तालाब की खुदाई करवा रही हैं, नहरें बनायी जा रही है ताकि पानी को रोका जा सके..पीने के लिए पानी मिल सके… जलीय जानवारों को ठिकाना मिल सके वहीँ रांची का ये तालाब जलकुम्भियों से जकड़ा हुआ है और प्रशासन आँख बंद किये हुए बैठा है.. प्रशासन सिर्फ तैयारी की बात करता है और बात सिर्फ बात ही रह जाती है.

रांची से सांसद संजय सेठ  ने जब सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें साझा की तो ये तालाब अपनी दयनीय स्थिति को बयान कर रहा था… जलकुम्भी से पट चुके इस तालाब में पानी तो कहीं दिखाई ही नही दे रहा… संजय सेठ से लिखा कि “कल राँची नगर निगम के बोर्ड की बैठक में मैंने यह प्रस्ताव दिया था कि स्वामी विवेकानंद सरोवर (बड़ा तालाब) की सफाई के लिए जनप्रतिनिधिओं व सामाजिक संस्थाओं को श्रमदान के लिए आगे आना चाहिए। हम श्रमदान कर इस तालाब की सफाई कर सकते हैं। मुझे लगता है इस मुद्दे पर अविलम्ब पहल होनी चाहिए.  रायपुर झील की तर्ज पर हम सब मिलकर इसकी साफ-सफाई कर बड़ा तालाब को संवार सकते हैं। उन्होंने कुछ नेताओं समेत रांची के मेयर को टैग करते हुए कहा कि आप सब पहल करें. व्यक्तिगत रूप से मैं इसके लिए तैयार हूँ.”

तालाब की सफाई जरूरी है… क्योंकि इस तालाब में मछलियाँ रहती है,, यहाँ प्रवासी पक्षी आते हैं… एक पर्यटन स्थल भी है और तालाब आज की जरूरत भी है इसलिए तालाब की सफाई भी जरूरी है. कुछ समय पहले एनवायरमेंटल साइंटिस्ट डॉ नीतीश प्रियदर्शी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जलकुंभी के आने का मतलब है कि पानी जहरीला हो गया है। इसमें ऑक्सीजन भी खत्म हो गया है। मछलियां मरने लगेंगी। दुर्गध से परेशानी बढ़ेगी।  देखभाल नहीं होने से ऐसा हो रहा है। सन 1872 में इस तालाब का निर्माण अंग्रेजों ने किया था। लेकिन, आज स्थिति ऐसी हो गई है कि इस तालाब का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। यही जलकुंभी सड़ कर नीचे कीचड़ बन जाएगा उन्होंने कहा था कि तालाब का बचा रहना जरूरी है। गर्मी में जब बारिश नहीं होने लगे, तो तालाब का ही पानी ही वाष्पीकृत होकर बादल बनाता था। इससे दोपहर के बाद बारिश होती थी। लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा है। मतलब अब हम रेगिस्तान की ओर बढ़ रहे हैं। अगर इस तालाब को युद्धस्तर पर नहीं बचाया गया, तो बड़ी आबादी भू-जल के लिए तरसेगी। आने वाले दिनों में तालाब के आसपास के एरिया में अंडरग्राउंड वाटर लेवल रसातल पर चला जाएगा। इसके बाद जो होगा, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती…

. तो सोचिये क्या हमें तालाब को बचाने के लिए आगे आना चाहिए साथ ही नगर निगम, मेयर और सरकार से जवाब मांगना चाहिए .. जहाँ करोडो रूपये लगाकर मूर्ति स्थपित किया गया. एक पर्यटन स्थल बनने की कोशिश की गयी.. आज वो तालाब अस्तिव की लड़ाई लड़ रहा है…