Report: भारत में मात्र 14 दिन में जंगल में आग की 82 हजार से ज्यादा घटनाओं का अलर्ट!

जंगलों में लगने वाली आग अब एक महत्वपूर्ण वैश्विक घटना बन चुकी है जिसके कारण हर साल पर्यावरणीय क्षति के साथ-साथ भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. पिछले कुछ सालों के दौरान जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं में एकाएक तेजी देखने को मिली है और ये घटनाएं अब एक तरह से वार्षिक आपदाओं में तब्दील होती हुई नजर आ रही है. भारत के जंगल भी इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं. वैश्विक स्तर पर वनों की निगरानी रखने वाली संस्था- ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच (GFW)  के अनुसार, इस साल 1-14 अप्रैल के बीच यानी मात्र 14 दिन में ही भारत में ही जंगलों में आग के 82,170 अलर्ट जारी किए जा चुके हैं जो पिछले साल की तुलना में कहीं ज्यादा हैं, या कह सकते है कि दोगुना है. साल 2020 में देश में इसी पखवाड़े यानी की 1 से 14 अप्रैल के दौरान 43,031 जंगल में आग के अलर्ट की सूचना मिली.

 

International Day of Forests 2021: From Nagaland to Himachal, 4 forest fires  that shocked India

बता दें कि ओपन-सोर्स मॉनिटरिंग एप्लिकेशन ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच ने विज़िबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सूट (VIIRS) अलर्ट का उपयोग करते हुए ये डेटा इकट्ठा किया है.

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2021 में जंगलों में आग लगने की संख्या भी बीते पांच सालों में सबसे ज्यादा है. इससे पहले सबसे ज्यादा साल 2017 में इसी अवधि के दौरान था, साल 2017 में 78,716 VIIRS अलर्ट दर्ज किए गए थे. 2016, 2018 और 2019 की अवधि में, दर्ज किए गए अलर्ट की संख्या क्रमशः 56,067, 25,701 और 43,508 थी.

इस आंकड़े में साल 2021 में 1 से 14 अप्रैल के बीच महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड, झारखंड और तेलंगाना को जंगली आग से सबसे प्रभावित राज्य बताया गया है.

इस साल मध्य प्रदेश ने पिछले पांच सालों के दौरान सबसे ज्यादा VIIRS अलर्ट 22,797 देखे. झारखंड (इस महीने में 5,284 VIIRS अलर्ट) और Odisha (5,000 अलर्ट) ने भी VIIRS अलर्ट की संख्या में बहुत ज्यादा वृद्धि देखी है.

 

Uttarakhand witnessing unprecedented forest fires | Hindustan Times

जंगल में आग की बढ़ती घटनाओं का मुख्य कारण हाल के वर्षों में रिकॉर्ड उच्च तापमान और शुष्क मौसम के कारण बारिश की गंभीर कमी को माना जाता है. इसके अलावा जंगल में आग इंसानों और उनकी गतिविधियों के कारण भी होती है. वे शिकारियों और कुछ स्थानीय लोगों द्वारा शुरू किए जाते हैं, जो शिकार और अवैध लकड़ी काटने के लिए आग लगानें का काम करते हैं. इस आग से हर साल पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है.