29 दिनों से चल रही है आर्मीनिया और अजरबैजान की जंग हो गयी खत्म, अमेरिका ने किया हस्तक्षेप?

29 दिनों से चल रही है आर्मीनिया और अजरबैजान की जंग आखिरकार अब खत्म हो गयी है. दोनों देशों की तरफ से 26 अक्टूबर की रात को युद्ध को रोकने का एलान किया गया. आपको बता दें कि अर्मेनिया और अजरबैजान दुनिया के नक्शे में दो छोटे से देश हैं. लेकिन इन दो देशों के बीच नागोर्नो काराबाख को लेकर लगभग एक महीने से ऐसी भीषण जंग चल रही थी. ऐसा दावा किया जा रहा है कि 29 दिन तक चले इस जंग में अब तक दोनों पक्षों के लगभग 5 हजार लोग मारे गए हैं.

कहा जा रहा है कि अमेरिका की पहल पर आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच संघर्ष विराम हुआ है. इसका ऐलान खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने किया. ऐसा भी नही है कि इस युद्ध को रोकने के लिए पहली बार किसी देश ने पहल की हो.. दो बार रूस की मध्यस्थता से संघर्षविराम की कोशिशें जा चुकी हैं, लेकिन दोनों ही बार संघर्षविराम टिक नहीं पाया और फिर से लड़ाई छिड़ गई.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करके कहा, ‘आर्मीनियाई पीएम निकोलस पशिनान और अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को बधाई, जो आधी रात को प्रभावी ढंग से संघर्ष विराम का पालन करने के लिए सहमत हुए. इससे कई लोगों की जान बचाई जाएगी.’ इससे पहले माइक पोम्पियो ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से बात के बाद संघर्ष विराम का ऐलान किया था. दरअसल इस विवाद के केंद्र में नागोर्नो-काराबाख का पहाड़ी इलाक़ा है जिसे अज़रबैजान अपना कहता है, हालांकि 1994 में ख़त्म हुई लड़ाई के बाद से इस इलाक़े पर आर्मीनिया का कब्ज़ा है. इससे पहले यहां साल 2016 में भी भीषण लड़ाई हुई थी जिसमें 200 लोगों की मौत हुई थी.

1980 के दशक से अंत से 1990 के दशक तक चले युद्ध के दौरान 30 हज़ार से अधिक लोगों को मार डाल गया और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए थे. अलगावादी ताक़तों ने नागोर्नो-काराबाख के कुछ इलाक़ों पर कब्ज़ा जमा लिया, हालांकि 1994 में युद्धविराम के बाद भी यहां गतिरोध जारी है. रह रह कर लड़ाई छिड़ जाती है.. अब तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस बार के तनाव की शुरूआत किसने की है, हालांकि जुलाई के बाद के महीनों से लगातार इस इलाक़े में तनाव अपने चरम पर था.

नागोर्नो-काराबाख 4,400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ एक बड़ा इलाका है। इस इलाके में आर्मीनियाई ईसाई और मुस्लिम तुर्क रहते हैं। ये इलाका अजरबैजान के बीच आता है। बताया जाता है कि सोवियत संघ के अस्तित्व के दौरान ही अजरबैजान के भीतर का यह एरिया एक स्वायत्त (Autonomous Area) बन गया था। अतरराष्ट्रीय स्तर पर इस इलाके को अजरबैजान के हिस्से के तौर पर ही जाना जाता है लेकिन यहां अधिकतर आबादी आर्मीनियाई रहती है। 1991 में इस इलाके के लोगों ने खुद को अजरबैजान से स्वतंत्र घोषित करते हुए आर्मेनिया का हिस्सा घोषित कर दिया। उनके इस हरकत को अजरबैजान ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कुछ समय के अंतराल पर अक्सर संघर्ष होते रहते हैं।

हालाँकि एक बार फिर दोनों देशों ने युद्ध को रोकने पर सहमति जताई है लेकिन देखने वाली बात ये है कि आख़िरकार अब ये युद्ध कबतक रुका रहता है!

इस खबर के लिखे जाने के कुछ देर बाद दोनों देशों के बीच फिर बमबारी की ख़बरें सामने आ रही है.