असम-मेघालय लड़ाई के बीच लड़ाई पर आरएसएस की सलाह! क्या है लड़ाई की असली वजह

असम और मेघालय के बीच माहौल तनातनी का बना हुआ है. विवाद की वजह हम आपको आगे बतायेंगे लेकिन असम और मेघालय को आरएसएस ने एक सन्देश भेजा है. अपने सन्देश में आरएसएस ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच “दोस्ताना माहौल” बनाए रखने के लिए प्रयास होना चाहिए. आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि “यह शांति के लिए एक विनम्र अपील है. मिजोरम और असम के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों… हमारा एक राष्ट्र, एक संविधान, एक राष्ट्रीय ध्वज है और इसलिए हम एक लोग हैं.

आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार, जो भारतीय ईसाई मंच के मुख्य संरक्षक हैं उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा, “यह शांति के लिए एक विनम्र अपील है. मिजोरम और असम के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों… हमारा एक राष्ट्र, एक संविधान, एक राष्ट्रीय ध्वज है और इसलिए हम एक लोग हैं. आइए हम किसी भी संघर्ष से बचें और शांति बनाए रखें और समृद्ध महान भारत के लिए आपस में एक दोस्ताना माहौल बनाएं और भड़काने वालों से सावधान रहें.

दरअसल कुछ दिन पहले ही असम और मेघालय के बीच उस वक्त हालात बिगड़ गये जब मिजोरम पुलिस ने असम के अधिकारियों की एक टीम पर गोलीबारी कर दी थी. जिसमें में असम पुलिस के अब तक सात कर्मियों और एक नागरिक की मौत हो गई है. एक पुलिस अधीक्षक सहित 50 से अधिक अन्य लोग जख्मी हो गए थे. इसके बाद से ही सीमावर्ती  इलाकों में माहौल बिगड़ गया और एक तरह से हिंसा का रूप ले लिया.

आखिर क्‍यों असम एक बार फिर अपने ही पड़ोसी राज्य के साथ भिड़ा है और क्‍यों देश के अंदर नॉर्थ ईस्‍ट में सीमा विवाद गहराता जा रहा है?

सीमा विवाद में अक्सर दोनों देशों के राज्य लड़ते रहते हैं.  असम और मिजोरम का बॉर्डर वर्तमान समय में करीब 165 किलोमीटर लंबा है और यह उस समय से मौजूद है जब मिजोरम को लुशाई हिल्‍स के तौर पर जाना जाता था. लुशाई हिल्‍स, असम का ही एक जिला था. साल 1875 में एक नोटिफिकेशन जारी हुआ और नोटिफिकेशन के बाद लुशाई हिल्‍स, काचर प्‍लेंस से पूरी तरह से अलग हो चुका था. इसके बाद एक नोटिफिकेशन साल 1933 में जारी हुआ. इस साल जो नोटिफिकेशन आया उसमें लुशाई हिल्‍स और मणिपुर के बीच एक सीमा को रेखांकित कर दिया गया.

लेकिन मिजोरम के लोगों का मानना है कि दोनों राज्यों की सीमा को सन् 1875 के नोटिफिकेशन के आधार पर रेखांकित करना तय हुआ  था. यह नोटिफिकेशन बंगाल ईस्‍टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (BEFR) एक्‍ट, 1873 से तैयार किया गया था, पर मिजो नेताओं का कहना है कि पहले भी सन् 1933 के आधार पर तय हुई थी तब सीमा का विरोध किया जा चुका है. उनका कहना है कि सीमा का निर्धारण करते समय मिजो नागरिकों से पूछा नहीं गया था और इसमें उनकी सलाह भी नहीं ली गई थी. मिजो नेताओं की मानें तो असम सरकार सन् 1933 के सीमा निर्धारण को मानता है और संघर्ष की असली वजह यही है.