वैज्ञानिकों को कोरोना के इलाज में मिला ‘महत्वपूर्ण कामयाबी’ अमेरिकी कंपनी बनाएगी कोरोना वैक्सीन की 2 अरब खुराक, कोरोना वैक्सीन से जुड़ी हर अपडेट यहां जाने..

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन (UPMC) के वैज्ञानिकों को कोरोना से बचाव और इलाज को लेकर एक ‘महत्वपूर्ण कामयाबी’ हाथ लगी है. वैज्ञानिकों के अनुसार, उन्होंने सबसे छोटे बायोलॉजिकल मॉलेक्यूल को अलग कर लिया है जो कोरोना वायरस को न्यूट्रलाइज करने में सक्षम है.

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नए ढूंढे गए मॉलेक्यूल से वैज्ञानिकों ने Ab8 दवा तैयार की है. असल में ये मॉलेक्यूल एंटीबॉडी का एक हिस्सा है. यह सामान्य आकार के एंटीबॉडी से 10 गुना ज्यादा छोटा है.इस दवा का चूहों पर परीक्षण किया गया. जिन चूहों को ये दवा दी गई उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा 10 गुना कम पाया गया है. ये मॉलेक्यूल ह्यूमन सेल से जुड़ता नहीं है, इसलिए इसके निगेटिव साइड इफेक्ट होने का खतरा बहुत कम है. रिसर्चर्स की माने तो कोरोना के इलाज में Ab8 दवा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

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नई खोज के बाद वैज्ञानिकों को दवा का ह्यूमन ट्रायल शुरू करना होगा. हालांकि, Ab8 दवा का मूल्याकंन कई यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने भी किया है.सभी वैज्ञानिकों ने अब तक अपनी जांच में पाया है कि दवा वायरस को सेल्स में प्रवेश करने से वाकई में रोक देती है.

वही अमेरिकी दवा कंपनी Novavax ने मंगलवार को ऐलान किया कि वह अपनी संभावित वैक्सीन को बनाने की क्षमता को दोगुनी करने जा रही है. कंपनी ने कहा कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के साथ हुए करार के तहत अब वह कोरोना वैक्सीन की सालाना 2 अरब खुराक तैयार कर लेगी.

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उधर सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) को ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल को फिर से शुरू करने की अनुमति मिल गई है. सीरम इंस्टीट्यूट भारत में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन को ब्रिटेन की एस्ट्रेजेनिका के साथ तैयार कर रही है.ऐसे में देश में जारी कोरोना संकट के बीच ये एक अच्छी खबर सामने आ रही है.