Sharad Purnima 2020: आज पृथ्वी से 4 लाख 6 हजार 394 किलोमीटर दूर रहेगा चांद

आज शुक्रवार को सभी पूर्णिमा में विशेष मानी जाने वाली शरद पूर्णिमा का पर्व है. अश्विनी मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाया जाता है. इस पूर्णिमा को कौमुदी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. शरद पूर्णिमा का चांद और साफ आसमान मॉनसून के पूरी तरह चले जाने का संकेत देता है.

वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस दिन चंद्रमा की दूरी पृथ्वी से काफी दूर बताई गई है. इस दौरान अंतरिक्ष के सभी ग्रहों से निकलने वाली पॉजिटिव एनर्जी चांद की किरणों से सीधे धरती पर पहुंचती है.

Sharad Purnima Vrat Katha in Hindi | Download Sharad Purnima Vrat Katha PDF  । शरद पूर्णिमा व्रत कथा और शरद पूर्णिमा कथा

यहाँ बता दे कि सामान्य दिनाें में चंद्रमा पृथ्वी से 4 लाख 8 हजार किलोमीटर की दूरी पर रहता है. लेकिन शुक्रवार काे शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 4 लाख 6 हजार 394 किलोमीटर की दूरी पर रहेगा. वही यहां आपको ये भी बता दें कि चांद जब 3 लाख 60 हजार की दूरी पर रहता है ताे उसे सुपरमून कहते हैं

वैज्ञानिक दृष्टि से शरद पूर्णिमा की रात स्वास्थ्य और सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. चन्द्रमा से निकलने वाली किरणों में विशेष प्रकार के लवण और विटामिन होते हैं.ऐसे में जब ये किरणें खानेपीने के सामान पर पड़ती हैं तो उनकी गुणवत्ता और ज्यादा बढ़ जाती है.

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इसके साथ ही शरद पूर्णिमा के दिन मान्यता ये भी है कि शरद पूर्णिमा की रात 10 से 12 बजे तक 30 मिनट के लिए चंद्रमा की रोशनी में रहना स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा होता है. इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसने की मान्यता भी है जिसके कारण भक्त खीर तैयार करते हैं और इसे चंद्रमा की रोशनी में रख देते हैं. ताकि चंद्रमा की दिव्य किरणों को इकट्ठा किया जा सके. फिर इसे अगले दिन प्रसाद के रूप में सभी के बीच बांटा जाता है.

बता दें कि इस बार शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 30 अक्टूबर की शाम 05: 47 मिनट से 31 अक्टूबर की रात 08:21 मिनट तक रहेगा.आज शरद पूर्णिमा के मौक़े पर श्रद्धालु तीर्थस्थलों पर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. वहीं कोरोना की वजह से मंदिरों में प्रतीकात्मक आयोजन किए गए हैं.