भारत में पहली बार बर्फानी तेंदुए की गिनती, चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने

भारत में पहली बार स्नो लैपर्ड यानी बर्फानी तेंदुए की गणना हुई है. दुनिया के सबसे दुर्लभ वन्य जीवों में शामिल स्नो लैपर्ड की गणना करने वाला हिमाचल प्रदेश पहला राज्य है जहाँ बर्फानी तेंदुए की संख्या लगभग 73 आंकी गयी है..इनमें शावक यानी तेंदुए के बच्चे शामिल नहीं किये गए है. हिमाचल प्रदेश में पहली बार इसका न केवल सर्वे हुआ बल्कि वैज्ञानिक आधार पर गिनती भी की गई है. यही वजह है कि हिमाचल प्रदेश बर्फानी तेंदुए और इसके शिकार बनने वाले जानवरों की गिनती करने वाला पहला राज्य बन गया है.

India will commission its first-ever snow leopard survey to estimate the  population and geographical range of the snow leopard.

बर्फानी तेंदुए भारत के कई हिमालयी राज्यों में पाये जाते हैं लेकिन देश में किसी अन्य जगहों या राज्यों में इनकी संख्या का वैज्ञानिक अनुमान अभी तक नहीं लगाया गया है क्योंकि वे दूर-दराज और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहते हैं. ऐसे में हिमाचल प्रदेश में हुए इस आकलंन के बाद वन्य प्राणी प्रेमियों में खुशी की लहर सी दौड़ गई है. वहीँ बर्फानी तेन्दुआ यानि स्नो लैपर्ड हिमाचल प्रदेश का राज्य पशु भी है, इसलिए भी हिमाचल प्रदेश के लिए इस आकलन का विशेष महत्व है.

इस अध्ययन में ये भी पता चला है कि राज्य में हिम यानी बर्फानी तेंदुए की संख्या का घनत्व प्रति 100 वर्ग किमी पर 0.08 से लेकर 0.37 तक है. वहीं, स्पीति के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र, पिन घाटी और ऊपरी किन्नौर में इस जीव की संख्या का सर्वाधिक घनत्व है. राज्य के जिन 10 स्थानों पर हिम तेंदुआ देखा गया, वो है भागा, चंद्रा, भारमौर, कुल्लू, मियार, पिन, बास्पा, टाबो, हांगरांग और स्पीति.

Schedule of counting snow leopards in uttarakhand has been set

इस सर्वे से ये भी पता चला है कि ये तेंदुआ जिन जानवरों का शिकार करता है, उनकी भी संख्या काफी अधिक है. इनमें आइबेक्स, भरल और ब्लूशिप शामिल हैं. अध्ययन में ये भी पता चला है कि बर्फानी तेंदुए की एक बड़ी संख्या संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी है. इसका मतलब ये हुआ कि स्थानीय समुदाय इसके संरक्षण के लिए सबसे मजबूत सहयोगी साबित हो रहे हैं.

प्रकृति संरक्षण फाउंडेशन नामक बेंगलूरु की संस्था के माध्यम से ये सर्वेक्षण करवाया गया. संख्या का आकलन वन विभाग के वन्य प्राणी विंग के सहयोग से पूरा हुआ. ये सर्वे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रोटोकॉल के आधार पर किया गया. इस अध्ययन को पूरा करने में तीन साल का वक्त लगा. ये अध्ययन करने के बाद हिमाचल प्रदेश दुसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन गया है.