सूरज में हुआ बड़ा विस्फोट, धरती के बड़े सोलर स्टॉर्म की चपेट में आने की चेतावनी

अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने हाल में ही सूर्य पर हुए बड़े विस्फोटो के कारण धरती पर बड़े सोलर स्टॉर्म के आने की चेतावनी जारी करी है।  NOAA ने कहा है की हाल के कुछ घंटो में ही बड़े बड़े ताकतवर भू चुम्बकीये तूफान देखे गए है। बताया जा रहा है की यह तूफ़ान सूर्य पर तेज गति विधि के बाद दो अलग अलग “फिलामेंट विस्पोट” के कारण आता है। इस फिलामेंट विस्पोट को हम “कोरोनल मास्स एकक्शन” के रूप में भी जानते है।  NOAA ने इस तूफ़ान को G -3 की श्रेणी में रखा है।  हम आप को बता दे की G -३ की श्रेणी में स्ट्रांग तूफ़ान आते है।

क्या है G – 3 श्रेणी

G – 3 श्रेणी में स्ट्रांग तूफ़ान आते है।  इस तरह के तूफ़ान से मनुष्यो और अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों को काफी समस्या आती है। इस तरह के तूफ़ान से नेविगेशन सिस्टम और रेडियो में बाधा पहुँचती है।  प्रवासी जानवरो को भी समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है। अगर इस तूफ़ान से कोई समस्या उत्पन नहीं होती तो यह सौर तूफ़ान “नॉर्थेर्न लाइट्स ” जैसे खूबसूरत और अविश्वसनीय दृश्य को बना सकता है। अगर g -5 तूफ़ान होता है तो पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश वाले हिस्से पर रेडियो ब्लैकआउट हो सकता है , जिस वजह से रेडियो सिस्टम बन्ध पड़ जाता है। और हवाई जहाज और नाविकों से कोई एचएफ रेडियो संपर्क नहीं हो सकता है।

पहले से अनुमान

सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र जटिल और असमान है। इसका आंतरिक डायनेमो प्लाज्मा के रस्सियों और पूलों को ऊपर उठाता है, सतह के नीचे एक दूसरे के चारों ओर घुमाता और बहता है। लेकिन कभी-कभी, “सतह तनाव” को संभालने के लिए चुंबकीय बल बहुत अधिक हो जाते हैं। जब ऐसा होता है, तो क्षेत्र रेखाएं सबसे कम-ऊर्जा विन्यास में बदल जाती हैं, और आमतौर पर कुछ प्लाज्मा अंतरिक्ष में नष्ट हो जाते हैं, जिससे एक सीएमई बनता है। स्पेसवेदर चलाने वाले डॉ टोनी फिलिप्स के मुताबिक, यहां यही हुआ।

डॉ फिलिप्स ने कहा, “चुंबकीय फिलामेंट्स चुंबकत्व के प्लाज्मा से भरे ट्यूब होते हैं जो सूर्य के वायुमंडल से घूमते हैं।” “वे आसानी से अस्थिर हो जाते हैं और फट जाते हैं, खुद के टुकड़े अंतरिक्ष में फेंक देते हैं।” जब इस विशेष फिलामेंट को जाने दिया गया, तो इसने बारह हजार मील गहरी – और दस गुना से अधिक लंबी “आग की घाटी” छोड़ी। 

तारकीय गतिशीलता

 सूर्य वर्तमान में अपने ग्यारह साल के सौर गतिविधि चक्र के शुरुआती दौर में है। सनस्पॉट विकसित होंगे और 2025 के आसपास जब तक वे चरम पर नहीं होंगे, तब तक सौर फ्लेयर्स अधिक से अधिक तीव्र हो जाएंगे।

नासा ने पिछले शरद ऋतु के स१ के विस्पोट  वर्ग  के बारे में एक बयान में कहा, “एक विस्पोट  से हानिकारक किरणे  पृथ्वी के वायुमंडल से जमीन पर मनुष्यों को शारीरिक रूप से प्रभावित करने के लिए सक्षम नहीं है।” “हालांकि जब इस विस्पोट की तीव्रता अधिक होगी तो यह वायुमंडल के उस परत को नुक्सान पंहुचा सकती है जहा पर जीपीएस और कम्युनिकेशन सिस्टम के सिग्नल्स होते है।  यानि की अधिक तीव्रता के कारण GPS और कम्युनिकेशन सिस्टम कुछ देर के लिए काम नहीं करेंगे।

नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी अपनी उच्च भू-समकालिक कक्षा से उन सभी का निरीक्षण करने के लिए होगी। लेकिन हमारे पास आकाश में अधिक आंखें हैं: सौर ऑर्बिटर, नासा और ईएसए की संयुक्त परियोजना, इस सभी सौर गतिविधि का निरीक्षण करने के लिए एक प्रमुख स्थिति में होगी। अपने निकटतम दृष्टिकोण पर, ऑर्बिटर सूर्य के 26 मिलियन मील के दायरे में उड़ान भरेगा।