कहीं हाथी को ज़िंदा जलाया तो कहीं बाघ को मारकर खा गये मांस, इन्सान जानवर से भी बदतर!

आमतौर पर जंगली जानवर जंगल में शिकार कर अपना पेट भरते हैं लेकिन इंसान इतना गिर चुका है कि संरक्षित जंगली जानवरों को मारकर उन्हें खाने की शुरुआत कर चुका है.. इतना ही नही इंसान अब हैवान बन चुका है… पहले जगलों पर इंसानों ने कब्जा किया और जब जंगली जानवर उनके बस्तियों में घुसने लगे तो उन्हें ऐसी मौत देते हैं जिसे देखकर रूह काँप जाए..

आज हम दो घटनाओं पर बात करने जा रहे हैं.. पहली घटना है केरल की जहाँ पांच लोगों ने एक तेंदुए को मारकर उसके मांस को पका कर खा अगये उअर दांत और  चमड़े को बेचने की फिराक में थे.. दूसरी घटना है तमिलनाडु की जहाँ एकहाथी को ही आग के हवाले कर दियागया.. हाथ आग से झुलस गया और उसकी मौत हो गयी..

हाल ही में तमिलनाडु में हाथी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। यहां नीलगिरी के मासिनागुडी में कुछ लोगों ने हाथी पर जलती हुई आग फेंक दी। इससे हाथी की जल कर मौत हो गई। इस घटना का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है कुछ लोगों के गिरफ्तार होने की खबर सामने आई है. वन्यजीव कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ लोगों ने हाथी पर जलता हुआ टायर फेंका था जिसकी वजह से उसकी मौत हुई है. घटना का एक  वीडियो सामने आया है जिसमें एक जलती हुई चीज़ हाथी के ऊपर फेंकते हुए देखा गया. इससे उसके कान और पीठ में आग लग गई और वह जंगलों की तरफ भाग रहा है. घटना की जानकारी जब वनविभाग को हुई तो उसके इलाज की व्यवस्था की गयी लेकिन हाथी इतना जल चुका था कि उसके कान अलग हो गये बाद में इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गयी..इस निर्मम घटना के आरोप में दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया जो अवैध रूप से लॉज चला रहे थे

दूसरी घटना केरल की है… जहाँ जानवरों पर अत्याचार की खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं. केरल के वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों ने तेंदुए को जाल में फंसाने, मारने और फिर उसके मांस को खाने के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह घटना केरल के इडुक्की (Idukki) में मनकुलम (Mankulam) फॉरेस्ट रेंज में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, केरल में पहली बार तेंदुए का शिकार कर उसका मांस खाने की घटना सामने आई है। इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान विनोद पीके (45), वीपी कुरीकोस (74), सीएस बिनु (50), कुंजन (54) और विंसेंट (50) के रूप में हुई है। हैरान करने वाली बात है कि ये सभी उम्र में बड़े हैं समझदार है इसके बावजूद संरक्षित तेंदुए को मारकार उसके मांस को खा गये.. ये वाकई बेहद परेशान करने वाला मामला है..

भारत सरकार ने वर्ष 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था. इसका मकसद वन्यजीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था. इसे वर्ष 2003 में संशोधित किया गया. तब इसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा गया. इसके तहत दंड और जुर्माना को कहीं कठोर कर दिया गया.

ये कानून केवल जंगली जानवरों ही नहीं,0 बल्कि सूचीबद्ध पक्षियों और पौधों को भी संरक्षण प्रदान करता है
न्यूनतम सजा – तीन साल
अधिकतम सजा – सात साल
न्यूनतम अार्थिक दंड – दस हजार रुपए
अधिकतम जुर्माना – 25 लाख रुपए
दूसरी बार अपराध करने पर भी इतनी ही सजा का प्रावधान. लेकिन कम से कम जुर्माना 25 हजार रुपए तक हो सकता है.

हालाँकि हमारे देश आज भी कई राज्यों में जमकर जंगली और संरक्षित जानवरों का शिकार कियाजा रहा है .. एक तरफ सरकार इन्हें संरक्षित करने में लगी हुई है तो वहीँ दूसरी तरफ इंसान रुपी कुछ लोग इनका बुरी तरह से शिकार करते हैं..