प्रदुषण की वजह से सोनिया गाँधी छोड़ेंगी दिल्ली? खराब स्वास्थ्य के चलते दी गयी सलाह

दिल्ली में प्रदुषण और कोरोना वायरस से बहलात बेकाबू होते जा रहे हैं.. पहले कोरोना ने लोगों की कमर तोड़ दी बाद में जब थोड़ी छूट मिली तो बाजार खुल गये और बाजार में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली.. लेकिन इसी भीड़ ने कोरोना के नियमों को तोडना शुरू कर दिया.. और कोरोना के मामले में इजाफा होने लगा.. वहीँ दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण में प्रदुषण आग में घी का काम कर गया… इससे कोरोना के मरीज और बढ़ते चले गये.. और आम लोगों को भी प्रदुषण कई बीमारियों से ग्रसित कर दिया..

वहीँ अब खबर है कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी प्रदुषण के चलते दिल्ली छोड़ने पर मजबूर हो गयी है.. सोनिया गांधी को कुछ दिनों के लिए दिल्ली से बाहर शिफ्ट होने की सलाह दी गई है। दरअसल सोनिया चेस्ट इंफेक्शन से जूझ रही हैं। यही कारण है कि उन्हें दिल्ली के प्रदूषण से बचने की सलाह दी गई है. कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी कुछ दिनों के लिए गोवा या चेन्नई शिफ्ट हो सकती हैं.
यहाँ आपको बता दें कि अगस्त में अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद से सोनिया गांधी का इलाज जारी है. दिल्ली के प्रदूषण ने अस्थमा और संक्रमण को बढ़ा दिया है। इसके चलते उन्हें डॉक्टरों द्वारा सलाह दी गई है कि वे यहां से बाहर जाएं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण लगातार खराब श्रेणी में बना हुआ है। शुक्रवार सुबह दिल्ली के सीरी फोर्ट पर वायु गुणवत्ता स्तर 287 रहा तो श्री अरबिंदो मार्ग पर 291 रहा। वहीं, चांदनी चौक में AQI 314, द्वारका में 336, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम 281 और मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के पास 279 रहा। वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था सफर इंडिया के अनुसार, फिलहाल हवा की दिशा उत्तर-पश्चिमी चल रही है। हवा की गति शांत है। ऐसे में अगले एक-दो दिन वायु प्रदूषण में और वृद्धि ही होगी।

वैसे अगर देखा जाये तो दिल्ली में प्रदुषण और कोरोना वायरस का संक्रमण दोनों अपने चरम पर हैं.. सोनिया गाँधी को तो किसी और शहर में शिफ्ट कर दिया जायेगा लेकिन आम लोगों का क्या होगा? उनका क्या होगा जिनके पास दुसरे शहर में शिफ्ट होने के लिए विल्कप ही नही है.. इस पर सरकार को चिंता करनी चाहिए.. इस पर हम सभी आपको और हमने चिंता करनी चाहिए कि अगर सरकारें इसी तरफ का रवैया प्रदुषण को लेकर अपनाती रहेंगी तो दिल्ली के आम लोग कहा जायेंगे? वे दिल्ली छोड़कर कहाँ जायेंगे जिनका सबकुछ दिल्ली ही है..? तो क्या यही अंतिम रास्ता बचेगा कि लोग बीमार होने के बाद दिल्ली छोड़कर किसी और शहर में चले जाएँ