मंकीपॉक्स की वजह से हडकंप, जानिये क्या हैं इसके लक्षण और बचाव के उपाय

अमेरिका में मंकीपॉक्स नाम की एक बीमारी से हडकंप मचा हुआ है. मंकीपॉक्स बीमारी के बारे में टेक्सास के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेन्शन (CDC) ने शुक्रवार को जानकारी दी है. एक व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित पाया गया है..जिसके बाद उसे आइसोलेशन में रखा गया है/. बीमारी से ग्रसित व्यक्ति कुछ दिन पहले ही नाइजीरिया से वापस अमेरिका गया था.

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के मुताबिक साल 1970 में पहली बार इंसानों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए थे। अब तक अफ्रीका के 11 देशों में इस वायरस की मौजूदगी पु‍ष्‍ट हो चुकी है। मंकीपॉक्‍स के शुरुआती मामले 1958 में सामने आए। जब रिसर्च के लिए रखे गए बंदरों में यह बीमारी फैली। इंसानों में मंकीपॉक्‍स का पहला केस 1970 में कान्‍गो (अफ्रीका) में दर्ज हुआ।

मंकीपॉक्स बीमारी संक्रमित व्यक्ति के समपर्क में आने से फ़ैल सकती है, साँस लिए और छोड़े जाने के दौरान मुंह से निकलने वाले बूँद के जरिये ये वायरस फैलते हैं और आसपास के लोगों को संक्रमित करते हैं.. इसीलिए इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को भी आइसोलेशन में रखा जाता है.

हालाँकि WHO के अनुसार, इस बीमारी से एक इंसान से दूसरे में संक्रमण दर काफी कम है। फिर भी संक्रमित व्‍यक्ति के छींकने-खांसने पर ड्रॉपलेट्स में वायरस मौजूद रहता है जो कोविड की तरह ही फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित जानवरों के खून, शारीरिक तरल पदार्थ या स्किन के संपर्क में आने के कारण वायरस इंसानों में फैलता है। ये बीमारी जानवरों से इंसानों में फैली है. अमेरिका में वर्ष 2003 में कुत्तों से 47 लोग इस वायरस की चपेट में आए थे।

अब अमेरिका की संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेन्शन ने जसी हवाई जगह से संक्रमित व्यक्ति नाइजीरिया से अमेरिका पहुंचा था उन यात्रियों की पहचान कर रही है ताकि उनकी जाँच कराई जा सके कि कहीं सम्पर्क में आने से वे व्यक्ति भी इस बीमारी से ग्रसित तो नही हो गये हैं.

WHO के मुताबिक, मंकीवायरस संक्रमण होने के बाद लक्षण दिखने में 6 से 13 दिन लग सकते हैं। संक्रमितों को बुखार, तेज सिरदर्द, पीठ और मांसपेशियों में दर्द के साथ गंभीर कमजोरी महसूस हो सकती है। बीमार शख्‍स के चेहरे और हाथ-पांव पर बड़े-बड़े दाने हो सकते हैं।

मंकीपॉक्स सांस के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। सीडीसी ने कहा कि इस मामले में ऐसा होने की संभावना कम है, क्योंकि कोविड -19 के कारण उड़ानों और अमेरिकी हवाई अड्डों पर मास्क पहनना अनिवार्य है, जिससे जोखिम कम हो जाता है।

अगर इस बीमारी के इलाज के बारे में बात करें तो इस बीमारी का कोई भी इलाज अभी तक नही है. इसके इलाज के लिए चेचक के टीकों को सबसे प्रभावी माना जाता है.

कैसे करें इस बीमारी से बचाव…

– चूँकि ये बीमारी जानवरों से इंसानों में फैलती है तो बीमार जानवरों से दूरी बनायें
– कच्चा, अधपका  मांस खाने से बचें, अगर शाकाहारी आहार लेते हैं तो इससे बढ़िया और कुछ नही..
– संक्रमित लोगों से दूरियां बनाकर रखें और साफ-सफाई का ख्याल रखें।
– सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण बात कि संक्रमण के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाएं।