इस जीव के 1 लीटर खून की कीमत है 11 लाख रुपए, अब इससे बनेगी कोरोना वैक्सीन

कोरोना वैक्सीन को बनाने में तमाम वैज्ञानिक और डॉक्टर्स जुटे हुए हैं. अब इसी बीच कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए एक दुर्लभ प्रजाति के जीव के खून का इस्तेमाल किया जा रहा है.

इस जीव का नाम है हॉर्सशू क्रैब.यह एक बेहद ही दुर्लभ प्रजाति का केकड़ा है. इस जीव का खून वैज्ञानिकों के लिए बेशकीमती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जीव के खून से कोविड-19 की वैक्सीन बनाई जा सकती है. यह इकलौता ऐसा जीव है जिसके खून के लिए दवा कंपनियां काफी ज्यादा खर्च करती हैं. क्योंकि इस जीव के नीले खून से वैक्सीन, दवाएं और स्टराइल लिक्विड्स बनते हैं.

इस जीव के नीले खून से बनेगी कोरोना ...

सबसे दिलचस्प बात तो यह कि इस जीव के एक लीटर नीले खून की कीमत 11 लाख रुपये है.जी हां इनका एक लीटर नीला खून अंतरराष्ट्रीय बाजार में 11 लाख रुपये तक बिकता है. यह दुनिया का सबसे महंगा तरल पदार्थ भी कहा जाता है. बताया जाता है कि हॉर्स शू केकड़े के खून का इस्तेमाल साल 1970 से वैज्ञानिक कर रहे हैं.एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक साल पांच करोड़ अटलांटिक हॉर्स शू केकड़ों का इस्तेमाल मेडिकल कामों में होता है.

दवा कंपनियों का मानना है कि इस जीव के खून से बहुत सारी दवाओं को सुरक्षित बनाया जाता है. इसके खून में लिमुलस अमीबोसाइट लाइसेट नाम का तत्व मौजूद होता है जो शरीर में एंडोटॉक्सिन नाम का बुरा रासायनिक तत्व खोजता है. ये तत्व किसी भी संक्रमण के दौरान शरीर में निकलता है.

ऐसे में अमेरिका में एक कोरोना वैक्सीन को ट्रायल करने के लिए दवा कंपनी को भारी मात्रा में लिमुलस अमीबोसाइट लाइसेट की जरूरत पड़ेगी और यह तो हॉर्स शू क्रैब से मिलेगा.

यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉर्स शू केकड़ा(Horseshoe crab) दुनिया के सबसे पुराने जीवों में से एक हैं और यह जीव पृथ्वी पर कम से कम 45 करोड़ साल से रहते है. ये जीव अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागर में पाए जाते है. ये हॉर्स शू केकड़े बसंत ऋतु से मई-जून के महिने तक ही दिखाई देते हैं. वही ये जीव पूर्णिमा के वक्त हाई टाइड में समुद्र की सतह तक आ जाते हैं. ऐसे में अब इन जीवों की जरूरत कोरोना वायरस के वैक्सीन बनाने में किया जाएंगा.