नरक का दरवाजा जहां 50 सालों से लगातार जल रही है आग

आपने शायद दुनिया के नरक के दरवाजे के बारें में जरूर सुना होगा. जी हां दुनिया में एक दरवाजा है जिसे नरक का दरवाजा कहते है. ऐसा क्यों आईए जानते है. ये नरक का दरवाजा तुर्कमेनिस्तान देश में है. दरअसल इस देश के काराकुम रेगिस्तान में दरवाजा नाम का एक गड्ढा है, जिसमें बीते 5 दशक यानी 50 सालों से आग लगातार धधक रही है. इसे ही पूरी दुनिया में नरक के दरवाजे के नाम से जानते है. बता दें कि गड्ढा एक गैस क्रेटर है, जो मीथेन गैस के चलते जल रहा है. अब अपने रहस्य के चलते ये जगह सैलानियों के लिए बड़ा आकर्षण है.

This Is Hell Door Fire Has Been Burning For 47 Years - OMG! ये है नरक का  दरवाजा! 47 सालों से जल रही है ऐसी आग जो आज तक... | Patrika News

कहा जाता है कि इस गड्ढे को इंसानों द्वारा ही बनाया गया है. असल में सत्तर के दशक की शुरुआत में जब तुर्केमेनिस्तान सोवियत संघ का हिस्सा था तब यहां प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार का पता लगा. तब रूस दूसरे विश्व युद्ध के बाद आई आर्थिक कमजोरी से जूझ रहा है.ऐसे में इसे खत्म करने में गैस के भंडार बहुत मददगार साबित हो सकते थे.

इसके लिए ही प्राकृतिक गैस निकालने की होड़ में साल 1971 में यहां बड़ा विस्फोट हो गया. इस विस्फोट के बाद ही वो गड्ढा बना, जिसे आज डोर टू हेल के नाम से जानते हैं. हादसे में मीथेन गैस के फैलाव को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने एक तरीका निकाला. उन्होंने गड्ढे के सिरे पर आग लगा दी. वैज्ञानिकों का अनुमान था कि आग गैस के खत्म होने के साथ ही बुझ जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आज लगभग पूरे 50 साल बीत गए है लेकिन बावजूद इसके आग वैसे ही धधक रही है. इसके पीछे का कारण समझने के लिए बहुत कोशिशे हुई है और आज भी हो रही है लेकिन फिलहाल अभी तक इसके पीछे की वजह कोई नहीं ढूंढ सका है.

The Door To Hell (Darvaza Gas Crater) | Unfiltered Travelling

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस गड्ढे में आग जल रही है, वह 229 फीट चौड़ा है और उसकी गहराई तकरीबन 65 फीट है. इससे जलने पर निकलने वाली मीथेन और सल्फर की गंध काफी दूर तक फैली रहती है. ये आग इतनी भयानक है कि इसकी लपटें कई मीटर की ऊंचाई तक उठती रहती हैं. साथ ही गड्ढे के भीतर खौलती हुई मिट्टी दिखती है.

ये नर्क का द्वार काराकुम रेगिस्तान में स्थिति है. देश का लगभग 70 प्रतिशत इलाका इसी रेगिस्तान के क्षेत्र में आता है. इतना ही नहीं काराकुम दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तानों में से है, जहां लगभग 10 सालों में एकाध बार कभी बारिश होती है.